पुलिस स्मृति दिवस पर 154 शहीद जवानों को दी श्रद्धांजलि परिजनों का सम्मान दशहरा मैदान में चूक : श्रीराम के पहुंचने से पहले ही रावण हुआ खाक व्यवस्था पर उठे सवाल 63 साल की परंपरा टूटी राम पहुंचे न चला बाण पहले ही जल उठा रावण पंजीयन की तारीख बढ़ाने की मांग पर किसान गर्जना का अल्टीमेटम रेल रोको आंदोलन की दी चेतावनी मातृभूमि की रक्षा और कर्तव्य निर्वहन के दौरान अपने प्राणों का सर्वोच्च बलिदान देने वाले पुलिस जवानों की शहादत को नमन करते हुए बुधवार को पुलिस लाइन बालाघाट में पुलिस स्मृति दिवस मनाया गया। इस दौरान देशभर में एक सितंबर 2025 से 31 अगस्त 2026 के बीच ड्यूटी के दौरान शहीद हुए 154 जवानों को श्रद्धांजलि अर्पित की गई। शहीदों के परिजनों का शॉल और श्रीफल भेंटकर सम्मान किया गया। समारोह में शहीदों के अदम्य साहस कर्तव्यनिष्ठा और देश के प्रति समर्पण को याद करते हुए उनके बलिदान को सदैव स्मरण रखने का संकल्प लिया गया। पुलिस लाइन में आयोजित हुए शहीद श्रद्धांजलि समारोह मे पुलिस बैंड की देशभक्ति प्रस्तुतियों ने भावुक कर दिया 63 साल से चली आ रही दशहरे की परंपरा में बालाघाट ने इस बार ऐसा दृश्य देखा जिसने उत्सव की खुशियों के बीच कई सवाल खड़े कर दिए। दशहरा मैदान में भगवान श्रीराम के आगमन का इंतजार हो रहा था लेकिन उससे पहले ही रावण का पुतला धू-धू कर जल उठा। न श्रीराम पहुंचे न उनके हाथों से बाण चला और न ही परंपरागत तरीके से रावण दहन हो सका। मैदान में हो रही आतिशबाजी से निकली एक चिंगारी रावण के पुतले में लगे पैरे पर गिरी और देखते ही देखते आग ने पूरे पुतले को अपनी चपेट में ले लिया। पुतले में लगे पटाखे फूटने लगे और कुछ ही देर में 63 साल की परंपरा का सबसे प्रतीक्षित दृश्य अधूरा रह गया। इस अप्रत्याशित घटना ने आयोजन की व्यवस्थाओं पर सवाल खड़े कर दिए हैं। दशहरा मैदान में रावण दहन से पहले आतिशबाजी का दौर चल रहा था। इसी दौरान आतिशबाजी से निकली चिंगारी रावण के पुतले में लगे पैरे पर जा गिरी। सूखी सामग्री ने आग पकड़ ली और कुछ ही पलों में लपटें तेज हो गईं। पुतले में लगे पटाखे एक के बाद एक फूटने लगे। देखते ही देखते रावण का पुतला जलकर राख हो गया। यह सब उस समय हुआ जब भगवान श्रीराम की शोभायात्रा के दशहरा मैदान पहुंचने और परंपरागत रावण दहन की प्रक्रिया पूरी होने का इंतजार था। खेतों में धान की फसल तैयार है किसान उपज बेचकर लागत निकालने और परिवार की जरूरतें पूरी करने की उम्मीद लगाए बैठे हैं लेकिन समर्थन मूल्य पर धान बेचने से पहले ही पंजीयन की तकनीकी बाधाएं उनके लिए मुसीबत बन गई हैं। कहीं सर्वर डाउन रहा तो कहीं फार्मर आईडी नहीं बन रही तो कहीं जमीन के रिकॉर्ड की त्रुटियां और पोर्टल पर बैंक खाते नहीं दिखने से पंजीयन अटक गया है। किसान संगठनों का दावा है कि इन समस्याओं के कारण जिले के हजारों किसान पंजीयन से वंचित रह गए हैं। ऐसे में शासन द्वारा घोषित 3100 रुपए प्रति क्विंटल की दर पर धान बेचने का उनका सपना अधर में लटक गया है। नाराज किसानों ने पंजीयन की तारीख बढ़ाने और तकनीकी खामियां दूर करने की मांग उठाई है। किसान गर्जना संगठन ने मांगें पूरी नहीं होने पर उग्र आंदोलन और रेल रोको की चेतावनी देकर प्रशासन के सामने चुनौती खड़ी कर दी है। बुराई पर अच्छाई की जीत के प्रतीक विजयादशमी पर्व पर लामता में दशहरा उत्सव श्रद्धा उत्साह और हर्षोल्लास के साथ मनाया गया। इस अवसर पर लामता के सरस्वती ग्राउंड में रावण दहन किया गया। रावण दहन देखने के लिए लोगों में उत्साह रहा और धार्मिक माहौल के बीच दशहरा पर्व मनाया गया। दशहरा उत्सव के अवसर पर लामता स्थित हनुमान मंदिर से भगवान श्रीराम माता सीता एवं हनुमान जी की वेशभूषा में सजी आकर्षक झांकी निकाली गई। चोला धारण कर हनुमान सेना के सदस्यों ने नगर भ्रमण किया। डीजे और बैंड-बाजे के साथ निकली झांकी ने पूरे नगर में उत्सव का माहौल बना दिया। नगर भ्रमण के दौरान श्रद्धालुओं में उत्साह देखने को मिला। शहर मुख्यालय सहित पूरे जिले भर में मातारानी की पूजा आराधना का पर्व शारदेय नवरात्रि ११ अक्टूबर से धूमधाम से हर्षोल्लास के साथ भक्तिमय माहौल में मनाया गया। दशहरा पर्व रावण दहन के बाद से मातारानी की प्रतिमा विसर्जन का सिलसिला प्रारंभ हो गया। दूसरे दिन 21 अक्टूबर को दोपहर से देर रात तक प्रतिमा विसर्जन का सिलसिला चलता रहा। दुर्गा समितियों द्वारा प्रतिमा विसर्जन के लिए डीजे धुमाल की धुनों के साथ भव्य शोभायात्रा निकाली गई। मातारानी की प्रतिमा को नदी व सरोवरों में पहुंचकर पूजा आरती कर नम आंखो से बिदाई दी गई। प्रतिमा विसर्जन स्थल पर सुरक्षा को लेकर पुलिस प्रशासन द्वारा पुख्ता इंतजाम किए गए थे। इसके अलावा बड़ी प्रतिमाओं को विसर्जन के लिए क्रेन की सुविधा भी की गई थी। प्रतिमा विसर्जन का सिलसिला 22 अक्टूबर को भी जारी रहेगा