शेयर बाजार में गिरावट से हफ्ते की कमजोर शुरुआत हफ्ते के पहले कारोबारी दिन सोमवार को घरेलू शेयर बाजार दबाव में नजर आया। BSE Sensex करीब 450 अंकों की गिरावट के साथ 73850 के स्तर पर कारोबार करता दिखा जबकि Nifty 50 भी लगभग 100 अंक टूटकर 22600 के स्तर पर आ गया। बाजार में गिरावट की मुख्य वजह निवेशकों की सतर्कता और वैश्विक संकेत माने जा रहे हैं। खासतौर पर ऑयल एंड गैस और फार्मा सेक्टर के शेयरों में भारी बिकवाली देखी गई जिससे बाजार पर अतिरिक्त दबाव बना रहा। सोना-चांदी की कीमतों में गिरावट निवेशकों की बदली रणनीति पश्चिम एशिया में जारी भू-राजनीतिक तनाव के बीच सोमवार को बुलियन मार्केट में सोने और चांदी की कीमतों में गिरावट दर्ज की गई। चांदी की कीमत 2290 रुपये गिरकर 2.31 लाख रुपये प्रति किलोग्राम पर आ गई जबकि सोने का भाव 1100 रुपये टूटकर 1.48 लाख रुपये प्रति 10 ग्राम पर पहुंच गया। आमतौर पर ऐसे तनाव के समय सोने में तेजी देखी जाती है लेकिन इस बार निवेशकों की मुनाफावसूली के चलते कीमतों में गिरावट देखने को मिली। मार्केट कैप में बड़ी गिरावट एयरटेल को सबसे ज्यादा झटका बीते सप्ताह के कारोबार में देश की शीर्ष 10 कंपनियों में से 6 की मार्केट वैल्यू में कुल 64734.46 करोड़ रुपये की गिरावट दर्ज की गई। इस दौरान Bharti Airtel को सबसे बड़ा नुकसान हुआ जिससे निवेशकों की चिंता बढ़ गई। बाजार में उतार-चढ़ाव और वैश्विक अनिश्चितताओं के कारण बड़ी कंपनियों के शेयरों पर दबाव बना हुआ है। वैश्विक तेल कीमतों में उछाल बढ़ी अनिश्चितता पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव का असर वैश्विक तेल बाजार पर भी साफ दिखाई दे रहा है। डोनाल्ड ट्रम्प की ओर से ईरान को दी गई सख्त चेतावनी के बाद बाजार में हलचल बढ़ गई है। ब्रेंट क्रूड की कीमत 0.74 प्रतिशत बढ़कर 109.8 अमेरिकी डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गई। विशेषज्ञों का मानना है कि अगर क्षेत्रीय तनाव और बढ़ता है तो तेल की कीमतों में और तेजी देखने को मिल सकती है जिससे वैश्विक अर्थव्यवस्था पर असर पड़ सकता है। ईंधन कीमतों को स्थिर रखने के लिए बड़ा कदम आपूर्ति संकट और वैश्विक कीमतों में उछाल के बीच सरकार ने ईंधन कीमतों को नियंत्रित रखने के लिए अहम फैसला लिया है। सरकारी तेल विपणन कंपनियां (OMCs) अब पेट्रोल डीजल विमान ईंधन (ATF) और केरोसिन को रिफाइनरियों से रियायती दरों पर खरीदेंगी। सूत्रों के मुताबिक ये दरें आयात लागत से करीब 60 रुपये प्रति लीटर तक कम तय की गई हैं। यह कदम ईंधन कीमतों के नियंत्रणमुक्त होने के बाद पहली बार उठाया गया है और इसका उद्देश्य उपभोक्ताओं पर महंगाई का बोझ कम करना है।