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व्यापार
12-May-2026

शेयर बाजार में भारी गिरावट सेंसेक्स 700 अंक टूटा देश के शेयर बाजार में मंगलवार 12 मई को बड़ी गिरावट देखने को मिली। बीएसई सेंसेक्स करीब 800 अंक फिसलकर 77200 के स्तर पर कारोबार करता नजर आया जबकि एनएसई निफ्टी भी लगभग 220 अंक गिरकर 23600 के आसपास पहुंच गया। वैश्विक बाजारों में कमजोरी मिडिल ईस्ट तनाव और निवेशकों की सतर्कता का असर भारतीय बाजार पर साफ दिखाई दिया। बैंकिंग आईटी और मेटल सेक्टर के शेयरों में सबसे ज्यादा दबाव देखने को मिला। सरकार का दावा- पेट्रोल डीजल और LPG की कोई कमी नहीं देशभर में ईंधन संकट की आशंकाओं के बीच केंद्र सरकार ने स्पष्ट किया है कि पेट्रोल डीजल और एलपीजी की पर्याप्त उपलब्धता है। सरकार ने लोगों से घबराकर खरीदारी न करने की अपील की है। अधिकारियों के अनुसार देश में ईंधन सप्लाई सामान्य बनी हुई है और सभी तेल कंपनियां लगातार निगरानी कर रही हैं। पीएम मोदी की अपील के बाद ज्वेलरी शेयरों में बड़ी गिरावट प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के हैदराबाद कार्यक्रम में “एक साल तक सोना न खरीदने” की अपील का असर शेयर बाजार पर भी दिखाई दिया। ज्वेलरी कंपनियों के शेयरों में भारी बिकवाली हुई और कई कंपनियों के शेयर करीब 10% तक टूट गए। निवेशकों को आशंका है कि सोने की मांग में कमी आने से ज्वेलरी कारोबार प्रभावित हो सकता है। गौतम अडाणी बोले- एनर्जी और इंटेलिजेंस अब राष्ट्रीय शक्ति का आधार नई दिल्ली में आयोजित CII एनुअल बिजनेस समिट 2026 में अडाणी ग्रुप के चेयरमैन Gautam Adani ने कहा कि आज के दौर में ऊर्जा सुरक्षा और डिजिटल इंटेलिजेंस एक-दूसरे से गहराई से जुड़े हुए हैं। उन्होंने कहा कि मिडिल ईस्ट संघर्ष ने दुनिया को यह समझा दिया है कि एनर्जी और डिजिटल सिक्योरिटी अब किसी भी देश की राष्ट्रीय ताकत का प्रमुख आधार बन चुके हैं। अडाणी ने चेतावनी देते हुए कहा कि जो देश शांति के समय अपनी क्षमता विकसित नहीं करते उन्हें संकट के समय भारी कीमत चुकानी पड़ती है। रुपये में गिरावट से बढ़ी आर्थिक चिंता ईरान संकट और वैश्विक अनिश्चितताओं के बीच भारतीय रुपया डॉलर के मुकाबले कमजोर होकर 95 के स्तर से नीचे पहुंच गया है। एसबीआई रिसर्च की रिपोर्ट के मुताबिक यदि रुपया लंबे समय तक इसी स्तर पर बना रहता है तो भारत की अर्थव्यवस्था का आकार घटकर 4.04 लाख करोड़ डॉलर रह सकता है। इससे भारत के 5 लाख करोड़ डॉलर की अर्थव्यवस्था बनने का लक्ष्य 2029-30 से पहले हासिल करना मुश्किल हो सकता है। रिपोर्ट में कहा गया है कि बाहरी दबाव और सट्टेबाजी के कारण रुपये पर दबाव बढ़ा है जिससे निपटने के लिए आयात प्रतिस्थापन निर्यात क्षमता बढ़ाने और वैश्विक मूल्य श्रृंखला में भारत की भागीदारी मजबूत करने की जरूरत है।