छत्तीसगढ़ के नक्सल प्रभावित सुकमा जिले में चलाए जा रहे ‘पूना मार्गेम’ (पुनर्वास से पुनर्जीवन) अभियान के तहत सुरक्षा बलों को बड़ी सफलता मिली है। अभियान से प्रेरित होकर 07 महिला कैडर सहित कुल 26 माओवादियों ने आत्मसमर्पण किया है। इसे माओवादी नेटवर्क के लिए बड़ा झटका माना जा रहा है। आत्मसमर्पण करने वाले माओवादी पीएलजीए बटालियन दक्षिण बस्तर डिवीजन माड़ डिवीजन तथा आंध्र–ओडिशा बॉर्डर (AOB) क्षेत्र में सक्रिय रहे हैं। इन आत्मसमर्पित माओवादियों पर कुल ₹64 लाख का इनाम घोषित था। छत्तीसगढ़ में ‘विकसित भारत–जी राम जी’ योजना को लेकर सियासत जारी है। योजना के तहत प्रभारी मंत्री जिलों में जाकर जनता को जानकारी दे रहे हैं। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने कहा कि मनरेगा के अंतर्गत अब 125 दिन का रोजगार मिलेगा जिसमें 25 दिन अतिरिक्त शामिल हैं। मजदूरी का भुगतान एक सप्ताह के भीतर अनिवार्य होगा देरी होने पर श्रमिकों को अतिरिक्त राशि दी जाएगी। मुख्यमंत्री ने बताया कि बुवाई और कटाई के दौरान दो महीने तक योजना के कार्य सीमित रहेंगे जिससे मजदूर किसानों के यहां काम कर सकेंगे। इससे श्रमिकों और किसानों दोनों को लाभ मिलेगा। इधर मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय गरियाबंद जिले के दौरे पर रवाना हुए। वे साहू समाज के आमंत्रण पर राजिम माता जयंती कार्यक्रम में शामिल होंगे। उनके साथ उपमुख्यमंत्री अरुण साव और मंत्री गुरु खुशवंत साहेब भी रवाना हुए। राजधानी रायपुर के पुलिस लाइन परिसर में बड़ी संख्या में पीपीई किट मिलने से प्रशासनिक हलकों में हड़कंप मच गया है। किट पैकेटबंद अवस्था में फेंकी हुई मिलीं जबकि कुछ पर जलाने के निशान भी पाए गए हैं। एक किट की कीमत करीब ₹1800 बताई जा रही है जिससे सरकारी संपत्ति के नुकसान की आशंका है। सबसे गंभीर बात यह है कि ये किट वर्ष 2020 की बताई जा रही हैं जब कोरोना महामारी के दौरान अस्पतालों में पीपीई किट की भारी कमी थी। ऐसे समय में इन किटों का उपयोग न होकर लावारिस हालत में मिलना प्रशासनिक लापरवाही या बड़ी चूक की ओर इशारा करता है।