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क्षेत्रीय
07-Jun-2021

एक छोटी सी कोशिश से आशा के जीवन की बदली तस्वीर छोटे-भाई बहनों की देखभाल और परिवार की आर्थिक तंगी के चलते जिस आशा ने सात साल पहले पढ़ाई छोड़ दी थी, आज वही आशा पूरे परिवार का सहारा और भविष्य की आशा बन गई है। पढ़ाई छोड़ चुकी आशा को पुनः पढ़ाई शुरू करने के लिये निरन्तर प्रोत्साहित करने और उसके माता-पिता को इसके लिये सहमत कराने की कोशिश रंगलाई। इस छोटी सी कोशिश ने आशा के जीवन की तस्वीर बदल दी।साल 2013 में 6 वीं क्लास से से पढ़ाई बन्द छोड़ने के बाद आशा के मन में यह कशक तो थी कि, वो भी औरों की तरह पढ़ाई करती। लेकिन अपने नाम के अर्थ को सार्थक करते हुए एक बार फिर सरकारी स्कूल में कक्षा आठवीं में दाखिला लिया। आशा ने पूरी लगन के साथ परिश्रम किया और आगे बढ़ते हुए 12 वीं के बाद भोपाल से लैब टैक्निशियन का डिप्लोमा किया। आशा आज भोपाल के एक निजी अस्पताल में लैब टैक्निशियन है। माता ममता और पिता मनोहर बरखाने अपनी बेटी आशा की कामयाबी पर गर्व करते है।