RBI ने बेचा सोना बढ़ाया विदेशी मुद्रा भंडार अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव का असर भारतीय अर्थव्यवस्था पर भी पड़ता दिखाई दे रहा है। ब्लूमबर्ग इकोनॉमिक्स की रिपोर्ट के अनुसार आरबीआई ने रुपये पर दबाव कम करने और विदेशी मुद्रा भंडार को मजबूत बनाए रखने के लिए लगभग 12 अरब डॉलर मूल्य का सोना बेचा है। इसके साथ ही केंद्रीय बैंक ने करीब 7.5 अरब डॉलर की विदेशी मुद्रा संपत्तियां भी जोड़ी हैं। इस कदम को वैश्विक आर्थिक अनिश्चितताओं से निपटने की रणनीति के रूप में देखा जा रहा है। शेयर बाजार में भारी बिकवाली बुधवार को भारतीय शेयर बाजार में बड़ी गिरावट देखने को मिली। सेंसेक्स करीब 900 अंक टूटकर 73700 के स्तर पर कारोबार करता नजर आया जबकि निफ्टी भी 250 अंक फिसलकर 23250 पर पहुंच गया। बाजार में सबसे ज्यादा दबाव आईटी सेक्टर के शेयरों पर रहा जहां निवेशकों ने जमकर बिकवाली की। वैश्विक अनिश्चितताओं और निवेशकों की सतर्कता का असर घरेलू बाजार पर साफ दिखाई दिया। RBI की मॉनेटरी पॉलिसी बैठक आज से शुरू भारतीय रिजर्व बैंक की मॉनेटरी पॉलिसी कमेटी यानी MPC की तीन दिवसीय बैठक आज से शुरू हो गई है जो 5 जून तक चलेगी। बैठक के बाद आरबीआई गवर्नर ब्याज दरों को लेकर फैसलों की घोषणा करेंगे। विशेषज्ञों का मानना है कि इस बार भी रेपो रेट में कटौती की संभावना कम है। इससे पहले अप्रैल की बैठक में भी ब्याज दरों को यथावत रखा गया था। पेट्रोल-डीजल फिर हो सकते हैं महंगे अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों का असर अब देश में भी दिखाई दे सकता है। रिपोर्ट्स के मुताबिक तेल कंपनियां पेट्रोल और डीजल के दामों में करीब ढाई रुपए प्रति लीटर तक की बढ़ोतरी कर सकती हैं। गौरतलब है कि 15 मई के बाद से ईंधन की कीमतों में पहले ही करीब साढ़े सात रुपए प्रति लीटर का इजाफा हो चुका है। वहीं सोना और चांदी भी लगातार महंगे हो रहे हैं। 24 कैरेट सोना 758 रुपए बढ़कर 1.56 लाख रुपए प्रति 10 ग्राम पहुंच गया जबकि चांदी 2050 रुपए की तेजी के साथ 2.65 लाख रुपए प्रति किलो के स्तर पर पहुंच गई। मानसून पर मंडराया अल-नीनो का खतरा निजी मौसम एजेंसी स्काईमेट ने चेतावनी दी है कि अल-नीनो की स्थिति अनुमान से पहले और अधिक तेजी से विकसित हो सकती है। प्रशांत महासागर के सतही और उप-सतही तापमान में तेजी से वृद्धि दर्ज की जा रही है जिससे भारत सहित दुनिया के कई हिस्सों में मौसम के पैटर्न प्रभावित हो सकते हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि यदि अल-नीनो और मजबूत हुआ तो दक्षिण-पश्चिम मानसून पर इसका असर पड़ सकता है जिससे बारिश की मात्रा और वितरण प्रभावित होने की आशंका बढ़ जाएगी।