लोकसभा चुनाव की गहमागहमी के बीच उत्तराखंड में एक बार फिर नोटिस पर सियासत गरमा गई है। पौड़ी लोकसभा सीट से कांग्रेस उम्मीदवार गणेश गोदियाल को इनकम टैक्स विभाग ने एक साथ तीन नोटिस भेजे हैं जिसे लेकर सवाल उठने लगे हैं। गणेश गोदियाल ने इसे डराने की साजिश बताया है। साथ ही उन्होंने चुनौती देते हुए कहा कि वो डरने वाले नहीं हैं और हर जांच के लिए तैयार हैं। गोदियाल ने कहा कि 2016 में भी उन्हें डराने और फंसाने की कोशिश हुई थी लेकिन जांच में कुछ नहीं निकला। गणेश गोदियाल ने नोटिस की टाइमिंग पर भी सवाल उठाए हैं। गढ़वाल संसदीय सीट से भाजपा प्रत्याशी अनिल बलूनी के नेतृत्व में आज दिग्गज कांग्रेसियों ने भाजपा का दामन थामा लिया है। आज पौड़ी के नए बस अड्डे में भाजपा द्वारा अनिल बलूनी के संबोधन का कार्यक्रम आयोजित किया गया था जिसमें सैकड़ो की संख्या में लोग पहुंचे। इस दौरान कांग्रेस से त्यागपत्र देने वाले पूर्व जिला पंचायत अध्यक्ष केशर सिंह नेगीपौड़ी ब्लॉक प्रमुख दीपक खुगशालपूर्व ब्लॉक प्रमुख कोट नवल किशोर ब्लॉक प्रमुख जयहरीखाल दीपक भंडारी सहित दर्जनों की संख्या में नेताओं व कार्यकर्ताओं ने भारतीय जनता पार्टी का दामन थामा। 2024 के लोकसभा चुनाव होने से पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सहित केंद्र के दिग्गज नेता उत्तराखंड में चुनावी रैलीयो में भाग लेंगे साथ ही जनसभा को भी संबोधित करेंगे।.. आपको बता दे प्रधानमंत्री मोदी की उत्तराखंड में दो जगह जनसभाएं होनी है।... जिसको लेकर बीजेपी पार्टी की तरफ से शेड्यूल तैयार किया जाएगा। वही बात करें तो भाजपा पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष महेंद्र भट्ट ने दावा किया है कि चुनाव से पहले कांग्रेस पार्टी के कई दिग्गज नेता भी भाजपा में शामिल हो सकते हैं। उत्तराखंड कांग्रेस पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष करन माहरा ने मुख्य निर्वाचन आयुक्त और भारत निर्वाचन आयोग को पत्र लिखकर पारदर्शी चुनाव कराए जाने की दृष्टिगत राज्य के डीजीपी को पद से हटाये जाने का अनुरोध किया है।...माहरा ने मुख्य निर्वाचन आयोग को पत्र लिखकर कहा है कि लोकसभा सामान्य निर्वाचन की प्रक्रिया गतिमान है ऐसे में निर्वाचन आयोग द्वारा उत्तराखंड में 19 अप्रैल को निर्वाचन की तिथि घोषित की जा चुकी है उनका कहना है कि राज्य के वर्तमान डीजीपी अभिनव कुमार पुलिस महानिदेशक बनने से पूर्व वर्तमान मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के प्रमुख सचिव के रूप में तैनात रहे चुके हैं ऐसे में सत्ताधारी दल के प्रति निष्ठा में चुनाव के निष्पक्षता पर प्रश्न चिन्ह खड़ा होता है।