लापता बेटे की तलाश करवाने दर-दर भटक रहा पिता सडक़ बिजली पानी मूलभूत सुविधाएं की मांग को लेकर तीन दिवसीय हड़ताल पर बैठे दिव्यांगो ने आमरण अनसन की दी चेतावनी किरनापुर थाना अंतर्गत साल्हे निवासी रविन्द्र रामटेके का बेटा संगम कुमार उर्फ राजा गत १० जनवरी से भोपाल जाने बालाघाट से बस से रवाना होने के बाद से लापता हैए जिसका कोई पता नहीं चल पा रहा है। इस दौरान चिकित्सीय शिक्षा की पढ़ाई कर रहे बेटे की तलाश में पिता भोपाल से लेकर बालाघाट में दर-दर भटक रहा है। पुत्र के एकाएक गायब हो जाने से व्यथित पिता ने जनसुनवाई मे पहुचकर कलेक्टर को ज्ञापन सौपकर पुत्र को तलाश करवाने की मांग की है। एक ओर शासन प्रशासन द्वारा गांव.गांव घर.घर बिजली देकर हर घर को रौशन करने का दावा किया जा रहा है। तो वहीं दूसरी ओर आजादी के ७५ वर्ष बीत जाने के बाद भी कई गावो के ग्रामीण आज भी अंधेरे में अपनी जिंदगी गुजारने के लिए मजबूर हैं। इसी तरह एक मामला जिले के आदिवासी दुरानंचल क्षेत्र जनपद पंचायत बैहर के अंतर्गत आने वाली ग्राम पंचायत कुगांव के अंतर्गत आने वाले ४ गांवों का है। जहां के ग्रामीण पिछले कई वर्षों से अंधकार में अपना जीवन गुजारने के लिए मजबूर हैं। जिनकी कहीं कोई सुनवाई नहीं हो रही है। शहर के आम्बेडकर चौक के समीप उघान में कलेक्टर दर से रोजगार दिए जाने छात्रावास उपलब्ध कराने विद्यालयों और महाविद्यालयों में दिव्यांगों को निशुल्क शिक्षण देने परीक्षा शुल्क माफ करने व दिव्यांग जनों को दी गई ट्राई साइकिल की रिपेयरिंग करने सहित अन्य मांगों को लेकर गत २८ जनवरी से तीन दिवसीय हड़ताल पर बैठे दिव्यांगजनों की मांगों पर प्रशासन ने किसी प्रकार से कोई ध्यान नहीं दिया है। जिसके चलते दिव्यांगजनो में प्रशासन पर नाराजगी जाहिर की है। जिन्होंने तीन दिनों के भीतर मांग पूरी न होने पर अनिश्चितकालीन हड़ताल शुरू करने का ऐलान किया था।जिसके मुताबिक आज मंगलवार को तीन दिवसीय हड़ताल का अल्टीमेटम खत्म होते ही हड़ताल पर बैठे दिव्यांगजनों ने अब आमरण अनशन शुरू करने की चेतावनी दी है। शहीदों की स्मृति में मंगलवार को प्रात: 11 बजे कलेक्टर परिसर स्थित गांधी वाटिका में कलेक्टर कार्यालय के सभी विभागों के अधिकारी व कर्मचारियों ने दो मिनिट का मौन रखा गया। इस दौरान कलेक्टर डा गिरीश कुमार मिश्रा ने राष्ट्रपिता महात्मा गांधी की प्रतिमा पर पुजन व पुष्प अर्पित किये। आकस्मिक मृत्यु सम्भल कार्ड सहित तमाम तरह की योजनाएं होने के बावजूद भी कई बार हितग्राहियों को उन योजनाओं का लाभ नहीं मिल पाता और योजनाओं के लाभ लेने के लिए वे शासकीय कार्यालय के चक्कर काटते नजर आते हैं। बावजूद इसके भी उन्हें कहीं से राहत नहीं मिल पाती। एक ऐसा ही मामला तहसील परसवाड़ा के ग्राम डोंगरिया से सामने आया है। जहां संभल कार्ड धारी पत्नी की मौत होने पर उसका पति सहित परिवार के सभी सदस्य योजना का लाभ देने की मांग को लेकर लगभग २ माह से शासकीय कार्यालय के चक्कर काटने के लिए मजबूर है।