आदिवासी अंचल में बच्चों की बीमारी से बढ़ा संकट जिला अस्पताल का चाइल्ड वार्ड फुल 14 लाख में नीलाम बाजार बदले में कीचड़ और जलभराव! खड़गे के कार्यक्रम स्थल के ‘शुद्धिकरण’ के विरोध में कांग्रेस का प्रदर्शन राहुल गांधी पर FIR का जताया विरोध कांग्रेस ने हल्द्वानी में मल्लिकार्जुन खड़गे के कार्यक्रम के बाद कथित रूप से गंगाजल छिड़ककर ‘शुद्धिकरण’ किए जाने के विरोध में प्रदर्शन किया। मंगलवार को शहर कांग्रेस कमेटी ने हनुमान चौक पर धरना देकर भाजपा और आरएसएस की कथित जातिवादी मानसिकता के खिलाफ नाराजगी जताई। कांग्रेस नेताओं ने कहा कि संविधान सभी नागरिकों को समानता सम्मान और गरिमा के साथ जीने का अधिकार देता है। ऐसे में कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष के कार्यक्रम स्थल का कथित शुद्धिकरण सामाजिक समानता की भावना पर गंभीर सवाल खड़े करता है। नेताओं ने राहुल गांधी द्वारा इस मुद्दे को लोकसभा में उठाए जाने के बाद उनके खिलाफ दर्ज FIR का भी विरोध किया। प्रदर्शन के दौरान कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने कार्रवाई वापस लेने की मांग की। आदिवासी अंचल में बच्चों की बीमारी ने स्वास्थ्य व्यवस्था के सामने गंभीर चुनौती खड़ी कर दी है। जिला अस्पताल का 50 बेड वाला चाइल्ड वार्ड मरीजों से पूरी तरह भर गया जिसके बाद कोविड काल में तैयार किए गए आईसीयू वार्ड में भी बच्चों को भर्ती करना पड़ा। अस्पताल में एक ही बेड पर दो से तीन बच्चों के इलाज की तस्वीर सामने आई है। हालात का जायजा लेने कलेक्टर कुमार सत्यम मंगलवार देर रात जिला अस्पताल पहुंचे। उन्होंने बच्चा वार्ड और कोविड आईसीयू में भर्ती बच्चों के परिजनों से बातचीत की। कलेक्टर ने अधिकारियों से मरीजों की संख्या और अतिरिक्त व्यवस्थाओं की जानकारी ली। जिले में मासूम बैगा बच्चों की मौत पर बालाघाट केमिस्ट एंड ड्रगिस्ट एसोसिएशन ने नाराजगी जताई है। उन्होंने 3 सितंबर को प्रस्तावित बालाघाट बंद को अपना समर्थन देने का निर्णय लिया है। एसोसिएशन के जिला अध्यक्ष सुरेश सोनी एवं पदाधिकारी प्रियांक वर्मा ने 2 सितंबर को पत्रकारों से चर्चा के दौरान कहा कि मासूम बच्चों की मौत के मामले में शासन-प्रशासन को गंभीरता से जिम्मेदारी तय करनी चाहिए। उन्होंने कहा कि बच्चों की मौत जैसी संवेदनशील घटना को केवल आर्थिक सहायता देकर समाप्त नहीं किया जा सकता बल्कि पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कर वास्तविक जिम्मेदारों की जवाबदेही निर्धारित करना जरूरी है। ग्राम पंचायत परसवाड़ा में हर बुधवार लगने वाला बैठकी बाजार इन दिनों बदहाली का शिकार है। बाजार की नीलामी करीब 14 लाख 10 हजार रुपये में होती है लेकिन यहां बुनियादी सुविधाएं तक नजर नहीं आतीं। बिजली घर से लगे बाजार परिसर में बारिश का पानी जमा है। जलनिकासी की व्यवस्था नहीं होने से पानी गंदे और बदबूदार कीचड़ में बदल गया है। ग्रामीणों और व्यापारियों को इसी गंदगी के बीच खरीदारी और कारोबार करना पड़ रहा है। जिम्मेदारों की कार्यप्रणाली पर सवाल उठ रहे हैं। जिले के आदिवासी अंचलों में बच्चों के लगातार बीमार होने और उपचार के लिए जिला अस्पताल पहुंचने के बीच 2 सितंबर को सिविल सर्जन डॉ. निलय जैन ने प्रेस वार्ता की। उन्होंने अस्पताल में भर्ती बच्चों की स्थिति और स्वास्थ्य व्यवस्थाओं की जानकारी दी। डॉ. जैन ने बताया कि शुरुआत में बच्चों की संख्या सीमित थी इसलिए उपलब्ध संसाधनों के अनुसार व्यवस्थाएं पर्याप्त थीं। अचानक बड़ी संख्या में बच्चों के अस्पताल पहुंचने से व्यवस्थाओं पर दबाव बढ़ा और कुछ समय के लिए स्थिति अव्यवस्थित हुई। अस्पताल प्रबंधन ने तत्काल अतिरिक्त इंतजाम कर व्यवस्थाओं को संभाला। अब बच्चों के उपचार के लिए पर्याप्त व्यवस्था उपलब्ध है। भर्ती बच्चों की नियमित निगरानी की जा रही है। डॉक्टर और स्वास्थ्यकर्मी उनकी स्थिति पर लगातार नजर रखते हुए जरूरत के अनुसार उपचार उपलब्ध करा रहे हैं। बैहर-बिरसा क्षेत्र में आदिवासी बैगा बच्चों की मौत के मामले में डॉक्टरों को जिम्मेदार ठहराने पर इंडियन मेडिकल एसोसिएशन ने आपत्ति जताई है। बुधवार को एक निजी होटल में पत्रकारों से चर्चा करते हुए वरिष्ठ चिकित्सक डॉ. बी.एम. शरणागत IMA अध्यक्ष डॉ. प्रवीण ज्योतिषी डॉ. अर्चना शुक्ला और डॉ. आशुतोष बांगरे ने कहा कि डॉक्टरों को दोषी ठहराना न्यायोचित नहीं है। इससे शासकीय और निजी चिकित्सकों का मनोबल प्रभावित होगा। उन्होंने कहा कि बच्चों की मौत बेहद दुखद है और डॉक्टरों की भी संवेदनाएं पीड़ित परिवारों के साथ हैं। IMA पदाधिकारियों ने आरोप लगाया कि मामले को राजनीतिक रंग भी दिया जा रहा है। उन्होंने सरकार से पूरे मामले की जांच कर वास्तविक जवाबदेही तय करने की मांग की।