बैगा बच्चों की मौत पर 5 सितंबर को महाधरना 18 राज्यों के आदिवासी संगठन होंगे शामिल अवंती बाई चौक से बैहर रोड़ बदहाल आवागमन में परेशानी शराबबंदी को लेकर रतनारा की महिलाओं ने कलेक्टर से लगाई गुहार बैहर-बिरसा क्षेत्र के बैगा आदिवासी बच्चों की मौत के मामले में न्याय की मांग को लेकर 5 सितंबर को आम्बेडकर चौक पर राष्ट्रीय महाधरना प्रदर्शन आयोजित किया जाएगा। आदिवासी संगठन के पदाधिकारी भुवनसिंह कोर्राम ने 1 सितंबर को पत्रकारों से चर्चा में यह जानकारी दी। उन्होंने बताया कि दिल्ली में राष्ट्रीय आदिवासी समन्वय समिति की कोर कमेटी की बैठक में बैहर क्षेत्र में हुई करीब 29 बैगा बच्चों की मौत के मुद्दे पर चर्चा हुई। प्रदर्शन में देश के करीब 18 ट्रायबल राज्यों के आदिवासी संगठनों के पदाधिकारी शामिल होंगे। संगठन ने 3 सितंबर को प्रस्तावित बालाघाट बंद का समर्थन किया है। संगठन की मांग है कि मृत बच्चों के परिवारों को आर्थिक सहायता दी जाए और जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई कर पीड़ित परिवारों को न्याय दिलाया जाए। जिला मुख्यालय के अवंतीबाई चौक से बैहर रोड़ की हालत बदहाल होने से स्थानीय रहवासियों ने मंगलवार को कलेक्ट्रेट पहुंचकर सडक़ का नवीनीकरण व वर्तमान में शीघ्र मरम्मतीकरण किए जाने की मांग को लेकर कलेक्टर को ज्ञापन सौंपा है। इस दौरान स्थानीयजनों ने बताया कि अवंती बाई चौक से सरेखा बायपास देवटोला एवं भरवेली की ओर जाने वाली सडक़ में जगह-जगह गड्ढे हो गये है। इससे बारिश के समय गड्ढों में पानी भरा होने से राहगीरों वाहन चालकों व स्कूल-कॉलेज के विद्यार्थियों को आवागमन में भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। उन्होंनें कहा कि सडक़ की समस्या का शीघ्र निराकरण किया जाए नहीं तो रहवासियों सडक़ पर उतरकर उग्र प्रदर्शन किया जाएगा। किरनापुर क्षेत्र के ग्राम सारद के मछुआरा समूह ने तालाब का शीघ्र पट्टा आवंटित किए जाने की मांग को लेकर मंगलवार को कलेक्ट्रेट पहुंचकर ज्ञापन देकर कलेक्टर से गुहार लगाई है। मत्स्याखेट पर निर्भर करीब १० मछुआरा परिवार गत एक वर्ष से अपने रोजगार के लिए परेशान हैं। गांव के मछली पालन झाड़ी तालाब के दस वर्षीय पट्टे की अवधि समाप्त होने के बाद ग्राम सभा द्वारा मछुआरा समूह के पक्ष में प्रस्ताव पारित किए जाने के बावजूद अब तक पट्टा आवंटित नहीं किया गया है। इससे सारद के मछुआरा परिवार आर्थिक संकट से जूझ रहे है। उन्होंने कहा कि तालाब में मछली पालन कर मत्स्याखेट कर अपना व परिवार का जीवनयापन करते थे। लेकिन पट्टा नहीं मिलने से रोजगार की दिक्कत हो रही है। जिले के हट्टा क्षेत्र के ग्राम रतनारा में खुलेआम अवैध शराब की बिक्री से गांव का माहौल बिगडऩे व युवाओं में बढ़ रहे नशे की लत के चलते महिलाओं ने एकजुट होकर शराबबंदी किए जाने की मांग को लेकर मंगलवार को कलेक्ट्रेट पहुंचकर जनसुनवाई में कलेक्टर के नाम ज्ञापन दिया। इस दौरान महिलाओं ने कहा कि गांव में बिक रही शराब के कारण गांव का शांति व्यवस्था प्रभावित हो रही है। इसका असर युवा पीढ़ी एवं बच्चों पर भी पड़ रहा है। उन्होंने कहा कि शराब के नशे में आदमी घर में पत्नि व परिवार के लोग से विवाद करते है और नशे की लत पूरी करने चोरी व अन्य आपराधिक कृत्य में भी संलिप्त होते है। महिलाओं ने कलेक्टर से मांग की है कि गांव में बिक रही अवैध शराब पर पूरी तरह प्रतिबंध लगाया जाए। एक ओर सरकार गांव-गांव तक सडक़ पहुंचाकर विकास की रफ्तार तेज करने के दावे कर रही है वहीं बैहर तहसील क्षेत्र की ग्राम पंचायत हट्टा का पंडरी गांव आज भी बेहतर सडक़ जैसी बुनियादी सुविधा के लिए तरस रहा है। आजादी के 80 वें वर्ष में प्रवेश के बावजूद गांव के लोगों को बरसात के दिनों में कीचड़ और पानी से भरे बदहाल रास्तों से गुजरना पड़ रहा है। हालत यह है कि आपात स्थिति में बीमारों और गर्भवती महिलाओं को अस्पताल पहुंचाना चुनौती बन जाता है क्योंकि खराब रास्ते के कारण एंबुलेंस भी समय पर गांव तक नहीं पहुंच पाती। वर्षों से सडक़ की समस्या झेल रहे ग्रामीणों ने अब जिला प्रशासन से सीधे गुहार लगाई है। ग्राम पंडरी के ग्रामीणों ने कलेक्टर को आवेदन सौंपकर गांव में प्रधानमंत्री सडक़ योजना के तहत पक्की सडक़ निर्माण कराए जाने की मांग की है। ग्रामीणों ने गांव की वास्तविक स्थिति का निरीक्षण कराकर शीघ्र सडक़ निर्माण की स्वीकृति देने की मांग की है। बालाघाट-गोंदिया हाईवे पर स्थित मर्री टोल प्लाजा में स्थानीय वाहनों से टोल टैक्स वसूली के विरोध में अब ट्रांसपोर्टर और व्यापारी संगठन सडक़ पर उतरने जा रहे हैं। कलेक्टर से चर्चा एनएचएआई अधिकारियों से बातचीत और सांसद के समक्ष समस्या रखने के बाद भी जब समाधान नहीं निकला तो संगठनों ने आंदोलन का रास्ता चुन लिया है। बालाघाट ट्रक ट्रांसपोर्ट एसोसिएशन सहित विभिन्न परिवहन और व्यापारी संगठनों ने 3 सितंबर को मर्री टोल टैक्स पर पहुंचकर प्रदर्शन करने का निर्णय लिया है। जिल के दक्षिण बैहर में एक बार फिर स्वास्थ्य सेवाएं बेपटरी हो गई है। बच्चों की बीमारी से हालात बिगड़ गए हैं। विभिन्न बीमारियों से अभी तक 27 आदिवासी बच्चों की मौत हो चुकी है। वहीं जिला चिकित्सालय में करीब 100 बच्चे उपचार के लिए भर्ती है। इनमें कई बच्चे उल्टी-दस्त बुखार मलेरिया डायरिया खसरा और सर्दी-खांसी से पीडि़त हैं। जिला अस्पताल का आलम यह है कि 50 बिस्तरों वाले शिशु वार्ड में एक बेड पर 3-4 बच्चों का इलाज करना पड़ रहा है। रोजाना करीब 20 से 30 बच्चे भर्ती होते हैं। 13 बच्चे पीआईसीयू में भर्ती हैं। सिविल सर्जन डॉ. निलय जैन के मुताबिक बच्चों के इलाज के लिए अतिरिक्त व्यवस्था की मांग करते हुए जबलपुर के ज्वाइंट डायरेक्टर को पत्र लिखा है। इसमें अतिरिक्त बेड और स्टाफ नर्स की तत्काल व्यवस्था करने की मांग की गई है।