कांकेर जिले के पखांजूर में जनप्रतिनिधियों और सामाजिक संगठनों ने राज्यपाल के नाम ज्ञापन सौंपा। बड़ी संख्या में आदिवासियों ने खंजर में जनसभा कर रैली निकालकर अनुविभागीय अधिकारी कार्यालय पहुंचकर ज्ञापन दिया।ज्ञापन में कहा गया कि बस्तर संभाग के पांचवीं अनुसूची क्षेत्र में पेसा कानून लागू होने के बावजूद इसके प्रावधानों का पालन नहीं हो रहा। ग्राम सभा की अनुमति के बिना वन विभाग और पुलिस द्वारा अवैध शराब के नाम पर कार्रवाई और एफआईआर दर्ज की जा रही है।संगठन ने मांग की कि पेसा कानून के तहत गौण खनिज वन संपदा और वन भूमि से जुड़े फैसलों में ग्राम सभा की भागीदारी सुनिश्चित की जाए ताकि आदिवासियों के सामाजिक और आर्थिक विकास को बढ़ावा मिल सके। कबीरधाम जिले के सुदूर वनांचल क्षेत्रों में कलेक्टर गोपाल वर्मा ने निर्माण कार्यों की गुणवत्ता सुनिश्चित करने के लिए जमीन पर निरीक्षण किया। उन्होंने बोड़ला विकासखंड के ग्राम खडोदखुर्द दलदली और तरेगांव में सड़क निर्माण कार्यों का जायजा लिया।कलेक्टर ने प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना और मंडी बोर्ड द्वारा निर्मित सड़कों की गुणवत्ता मशीन के माध्यम से कोर कटिंग कर जांची। निरीक्षण में सड़कों को निर्धारित मापदंडों के अनुरूप पाया गया। उन्होंने अधिकारियों को गुणवत्ता पूर्ण निर्माण और बेहतर रखरखाव के निर्देश दिए।इसके अलावा ग्राम दुर्जनपुर में 19 लाख रुपए की लागत से बने चेकडैम का निरीक्षण किया। अधिकारियों ने बताया कि इससे 15-17 हेक्टेयर क्षेत्र में सिंचाई और निस्तारी की सुविधा मिलेगी। कलेक्टर ने इसके प्रभावी उपयोग और रखरखाव सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। पूर्व मंत्री मोहन मरकाम ने कहा कि गृहमंत्री ने बस्तर विकास के लिए 1 करोड़ रुपए की घोषणा की थी लेकिन अब जब गांव नक्सलमुक्त हो चुके हैं तो यह राशि जारी हुई या नहीं स्पष्ट नहीं है।मरकाम ने पूछा कि क्या कोई विशेष पैकेज दिया गया है जबकि UPA सरकार के दौरान विकास कार्यों के लिए 30-30 करोड़ रुपए की राशि दी जाती थी। उन्होंने वर्तमान सरकार को सिर्फ “घोषणावीर” बताया। छत्तीसगढ़ के उपमुख्यमंत्री विजय शर्मा ने कहा कि पश्चिम बंगाल में ममता बनर्जी की टीएमसी सरकार जनता की अपेक्षाओं पर खरी नहीं उतर रही है। उन्होंने दावा किया कि लोगों में असंतोष बढ़ रहा है और अब जनता बदलाव की ओर देख रही है। छत्तीसगढ़ के डिप्टी CM अरुण साव ने भूपेश बघेल के सवाल पर पलटवार किया। साव ने कहा कि बघेल कभी नहीं चाहते थे कि प्रदेश से नक्सलवाद खत्म हो। उन्होंने अपनी सरकार में पुलिस और जवानों का हाथ बांध दिया था जिससे नक्सलियों ने खुशी मनाई।साव ने कहा कि जब समय आएगा तो सुरक्षा बल लौटाए जाएंगे। उन्होंने आरोप लगाया कि बघेल का प्रदेश के विकास और खुशहाली से कोई लेना-देना नहीं।