कटंगी थाना अंतर्गत वार्ड नंबर 4 कटंगी निवासी पवन नामदेव की हुई हत्या के मामले में पुलिस ने मृतक की पत्नी सहित तीनों आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया है। मृतक पवन की पत्नी सरिता नामदेव ने अपने प्रेमी इम्तेयाज आलम और उसके छोटे भाई असलम आलम के साथ मिलकर हत्या की योजना बनाकर 1 2 जून की दर मियानी रात घर के अंदर ही पति पवन की कपड़े से मुहं दबाकर व गले में रस्सी बांधकर गला रेतकर हत्या कर दी गई थी। पुलिस ने इस मामले में आरोपी सरिता नामदेव को पहले ही पुलिस ने संदेह के आधार पर पकडक़र पूछताछ की गई थी जिसके द्वारा अपने प्रेमी इ तयाज आलम निवासी मोतीहारी बिहार और उसके भाई असलम आलम के साथ योजनाबद्ध तरीके से हत्या करना स्वीकार किया गया था। घटना के बाद से आरोपी दोनों भाई फरार थे जिन्हें कटंगी थाना पुलिस ने गिर तार कर लिया है। बालाघाट मुख्यालय से 3 किलोमीटर दूर आवलाझरी टवेझरी मार्ग पर संचालित शराब दुकान के विरोध में ग्रामीण महिलाओं ने प्रदर्शन किया । जानकारी अनुसार ग्राम पंचायत आवलाझरी टवेझरी मार्ग पर विगत कुछ वर्षों से रोड के किनारे शराब दुकान संचालित है। जिसे वहां से हटाकर अन्यत्र किए जाने की मांग को लेकर महिलाओं ने ग्राम के सरपंच के साथ शराब दुकान के सामने प्रदर्शन किया। शासन के निर्देश अनुसार ग्राम पंचायत लामता में जल गंगा संवर्धन अभियान अंतर्गत कार्यक्रम का आयोजन किया गया जिसमें ग्राम खैरा में जंगल तालाब का जीर्णोद्धार कार्य प्रारम्भ किया गया ग्राम पंचायत लामता द्वारा उक्त अभियान के अंतर्गत पुरानी कुओं का मरम्मत जगत निर्माण सोकपीट गड्डे का निर्माण किया जा रहा है उक्त अभियान कार्यक्रम मुख्य कार्यपालन अधिकारी जनपद पंचायत बालाघाट श्रीमती ममता कुलस्ते के निर्देशन में किया गया लामता सरपंच के द्वारा स्वयं शपथ लेते हुए समस्त ग्रामीण जनों को पानी बचाओ का शपथ दिलाई गई ।उनके द्वारा जल का महत्त्व मानव जीवन के लिए कितना महत्वपूर्ण है यह जानकारी भी दी गई तथा पर्यावरण को सुरक्षित बनाने हेतु वृक्षारोपण कर ग्रामीणों को मानव जीवन को वृक्षों का महत्त्व भी समझाया गया - जल गंगा संवर्धन अभियान ऐसे जल स्रोतों को भी पुनर्जीवन देने के लिए प्रारम्भ हुआ है। जो पहले कभी जल तृप्ति के महत्वपूर्ण आधार हुआ करते थे। लेकिन आधुनिकता ने ऐसे जल स्त्रोतों को पीछे छोड़ नवीन धारा में बहने लगें। लांजी नगर के श्रीराम मंदिर प्रांगण में करीब 200 वर्ष पुरानी बावड़ी है। जो आज से पहले डस्टबिन की तरह उपयोग में आ रही थी। इसमें पूजन हवन और भंडारे से बचा कूचा सामान डाला जा रहा था। लेकिन जल गंगा संवर्धन अभियान में अचानक इस पुराने जल स्त्रोत की ओर ध्यान गया। एसडीएम प्रदीप कौरव ने बताया कि शनिवार सुबह से करीब ३ घंटे यहाँ व्यापारी वर्गए शासकीय अधिकारियों और पार्षदगणों ने श्रमदान कर करीब २ टन कचरा और मिट्टी निकाली। इसके बाद बावड़ी पुनर्जीवित होने लगी। पानी निकलने लगा। श्रमदान के लिए नगर परिषद के साथ रूपरेखा बनाई गई। एसडीएम श्री कौरव ने बताया कि जनवरी तक इस बावड़ी में पानी बना रहता है। मंदिर प्रांगण स्थित इस बावड़ी के विषय मे बहुत कम लोगों को जानकारी है। पूर्व में भी इस बावड़ी के पुनरुद्धार के लिए कार्य योजना बनाई गई थी। मगर पंडित परिवारो के आपस विवाद के कारण कार्य नही हो सका। लेकिन इस अभियान में इसे प्रमुखता से लिया गया। करीब १० फिट तक गाद भर गई। जिसे श्रमदान से निकाला गया।