नई दिल्ली ईएमएस कांग्रेस नेता राहुल गांधी की मणिपुर यात्रा के बाद केंद्रीय मंत्रालय के अधिकारी मणिपुर पहुंचे. मणिपुर की वर्तमान स्थिति पर विचार विमर्श कर स्थिति को किस तरह से नियंत्रित किया जा सकता है. इस पर विचार विमर्श शुरू हो गया है.धारा 356 के बारे में सभी जानते हैं.इसमें केंद्र सरकार राष्ट्रपति शासन लागू करती है. केंद्र सरकार ने पहली बार धारा 355 का उपयोग मणिपुर में किया है. धारा 355 के तहत केंद्र सरकार को अधिकार मिल जाता है. जिस राज्य में धारा 355 लागू हो जाती है. वहां की कानून व्यवस्था पर केंद्र का सीधा कंट्रोल हो जाता है. केंद्र सरकार इसके बाद चाहे तो 356 लगाकर राष्ट्रपति शासन भी लागू करके निर्वाचित सरकार को अपदस्थ कर सकती है. अभी तक राज्यपाल धारा 355 के तहत अपनी रिपोर्ट तैयार कर केंद्र को भेजते थे. केंद्र सरकार सीधे ही धारा 356 मे राज्य सरकारों को भंग कर राष्ट्रपति शासन लागू कर देती थी. देश में पहली बारधारा 355 के तहत मणिपुर में कानून व्यवस्था केंद्र सरकार के अधीन है. केंद्र सरकार ने इसकी कोई अधिकृत घोषणा नहीं की नाही मणिपुर सरकार ने इसके बारे में कोई जानकारी दी. धारा 355 लागू करने के बाद केंद्र सरकार ने कानून व्यवस्था में सीधे हस्तक्षेप करना शुरू कर दिया है. डबल इंजन की सरकार होने के कारण केंद्र सरकार ने धारा 356 का उपयोग नहीं किया. जिसके कारण वहां राज्य सरकार भी है. लेकिन कानून व्यवस्था की स्थिति पर नियंत्रण सीधे केंद्र सरकार के पास है. सूचना अधिकार कानून के तहत कर्नाटक हाईकोर्ट के वकील ने एक जानकारी मांगी थी. जिसका स्पष्ट जवाब केंद्रीय गृह मंत्रालय ने नहीं दिया.मणिपुर के डीजीपी और पावरफुल विधायक ने धारा 355 लागू करने की बात कही है. लेकिन इसकी पुष्टि किसी के द्वारा नहीं की गई. मुख्यमंत्री ने सभी पार्टी की मीटिंग बुलाई. इसमें भी धारा 355 को लेकर मौन साध रखा है.देश में पहली बार धारा 355 का उपयोग हुआ है. जब धारा 355 से स्थिति काबू में नहीं आती है तो केंद्र सरकार धारा 356 का उपयोग कर सकती है. मणिपुर के मामले में केंद्र सरकार द्वारा 356 का उपयोग नहीं किया. देश में पहली बार धारा 355 को लागू किया गया. यह जानकारी केंद्र सरकार और राज्य सरकार छुपा रही है.जिसके कारण कहा जा रहा है मणिपुर के वर्तमान हालात को लेकर केंद्र सरकार और राज्य सरकार अपनी-अपने जिम्मेदारी से बचने का प्रयास कर रही हैं. राहुल गांधी की भारत जोड़ो न्याय यात्रा के बाद यह स्थिति एक बार फिर सामने आई है जब केंद्रीय गृह मंत्रालय के अधिकारी मणिपुर पहुंचे और वहां पर कानून व्यवस्था पर नियंत्रण करने के लिए नई