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क्षेत्रीय
11-Jun-2021

देशभर में भाजपा के गिरते जनाधार को देखते हुए राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ ने मोर्चा संभाल लिया है। संघ के रणनीतिकार 2022 और 2023 में होने वाले विधानसभा चुनावों और 2024 में होने वाले लोकसभा चुनाव के लिए अलग अलग रणनीति पर काम करना शुरू कर दिया है। संघ की रणनीति के अनुसार यूपी में योगी आदित्यनाथ ही सीएम का चेहरा होंगे। वहीं मप्र में राज्यसभा सांसद ज्योतिरादित्य सिंधिया मुख्यमंत्री का चेहरा होंगे। जबकि नरेंद्र मोदी की गिरती साख को देखते हुए मप्र के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान को प्रधानमंत्री का चेहरा बनाया जाएगा। भाजपा के राष्ट्रीय संगठन के सूत्रों का कहना है कि संघ की रणनीति सामने आने के बाद पार्टी में सियासी हलचल बढ़ गई है। इसी के चलते यूपी के सीएम योगी आदित्यनाथ ने गुरुवार को अचानक दो दिन का दिल्ली का प्रोग्राम बना लिया। संघ सूत्रों का कहना है की प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का जादू अब धूमिल होता जा रहा है। ऐसे में संघ के सामने शिवराज एक ऐसा चेहरा हैं जो सभी वर्ग को स्वीकार होगा। वहीं संघ की मंशा है कि शिवराज को केंद्र में लाकर ज्योतिरादित्य को मप्र का सीएम बनाकर सिंधिया घराने का कर्ज उतारा जाए। संघ भी शिवराज सिंह चौहान की नेतृत्व क्षमता से वाकिफ है और लोकप्रियता में मोदी के बाद नंबर दो के रूप में उन्हें देखता है। यह बात शिवराज भी अच्छी तरह से जानते हैं। यही कारण था कि 2014 के लोकसभा चुनाव में प्रधानमंत्री के दावेदार के रूप में शिवराज का नाम तेजी से उभरा था। लाल कृष्ण आडवाणी ने बहुत पहले से ही नरेंद्र मोदी के विरूद्ध शिवराज सिंह चौहान को खड़ा करने के लिए तैयारी शुरू कर दी थी। हालांकि अंत तक भाजपा आलाकमान ने आडवाणी को तवज्जो नहीं दिया, जिसमें संघ की मंशा शामिल थी। यही कारण था कि तमाम विरोधों को किनारे रखकर भाजपा हाईकमान ने नरेंद्र मोदी को प्रधानमंत्री पद का उम्मीदवार घोषित किया। लेकिन अब 2024 में संघ शिवराज पर दांव लगाने की तैयारी कर रहा है। वही प्रदेश में अपने बूते पर भाजपा की चौथी बार सरकार बनवाने वाले सिंधिया अब मुख्यमंत्री बनने के लिए पार्टी के दिग्गजों को साधने में जुटे हुए है। सूत्रों का कहना है कि संघ ने सिंधिया को निर्देश दिया है कि वे मप्र भाजपा के दिग्गज नेताओं को साध लें। अगर प्रदेश के सभी नेता एकमत हो गए तो उन्हें 2023 में सीएम का चेहरा घोषित किया जा सकता है। यही कारण है कि बुधवार को सिंधिया ने सत्ता और संगठन के साथ ही क्षेत्रीय नेताओं को साधने की कोशिश की। सिंधिया अब ग्वालियर-चंबल में अपने समर्थकों के साथ ही असंतुष्ट भाजपा नेताओं के साधने में जुटे हुए हैं। सूत्रों का कहना है कि अब सिंधिया महाकौशल और विंध्य का दौरा भी करेंगे।