गरियाबंद जनपद पंचायत की सामान्य सभा की बैठक में कई महत्वपूर्ण विभागों के अधिकारियों के नदारद रहने पर जमकर गहमागहमी देखने को मिली। वन विभाग PWD श्रम क्रेडा PMGSY कृषि उद्यानिकी और विद्युत विभाग के अधिकारियों की गैरमौजूदगी पर जनपद अध्यक्ष समेत अन्य जनप्रतिनिधियों ने नाराजगी जताई। जनप्रतिनिधियों का कहना है कि इन विभागों का ग्रामीण विकास और आम लोगों को सरकारी योजनाओं का लाभ दिलाने में अहम योगदान है। लेकिन अधिकारियों के बैठक में मौजूद नहीं रहने से ग्रामीण क्षेत्रों की समस्याओं पर प्रभावी चर्चा नहीं हो पा रही है। वहीं योजनाओं का सही प्रचार-प्रसार नहीं होने के कारण पात्र हितग्राहियों तक जरूरी जानकारी नहीं पहुंच रही है और वे योजनाओं के लाभ से वंचित हो रहे हैं। जनप्रतिनिधियों ने जिला प्रशासन से मामले में नाराजगी जताते हुए बैठक से अनुपस्थित रहने वाले संबंधित विभागीय अधिकारियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग की है। सूरजपुर के गणेशपुर प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र में स्वास्थ्य व्यवस्था की कथित लापरवाही का मामला सामने आया है। परिजनों का आरोप है कि 14 अक्टूबर की रात प्रसव पीड़ा के बाद गर्भवती महिला को अस्पताल लाया गया लेकिन केंद्र में ताला लगा था और कोई डॉक्टर या स्टाफ मौजूद नहीं था। इलाज नहीं मिलने के चलते अस्पताल के गेट के सामने ही महिला का प्रसव हो गया जिसके कुछ देर बाद नवजात की मौत हो गई। घटना से नाराज परिजनों और ग्रामीणों ने स्वास्थ्य केंद्र के बाहर प्रदर्शन कर जिम्मेदारों पर कार्रवाई की मांग की। मामला सामने आने के बाद स्वास्थ्य विभाग ने गणेशपुर स्वास्थ्य केंद्र के प्रभारी चिकित्सक राजेश पटेल और ANM प्रमिला गिरी को निलंबित कर दिया है। अधिकारियों के जांच और कार्रवाई के आश्वासन के बाद ग्रामीणों ने प्रदर्शन समाप्त कर दिया। घटना ने ग्रामीण क्षेत्रों में रात के समय स्वास्थ्य सेवाओं और आपातकालीन प्रसव व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। SIR को लेकर कांग्रेस के विरोध पर उप मुख्यमंत्री अरुण साव ने पलटवार किया है। उन्होंने कांग्रेस पर भ्रम फैलाने का आरोप लगाते हुए कहा कि पार्टी को कानून प्रक्रिया और नियमों की जानकारी नहीं है। साव ने कहा कि चुनाव से पहले मतदाता सूची में नाम जोड़ने की प्रक्रिया चलती है और जो लोग मतदाता बनने के पात्र हैं उनके नाम सूची में जोड़े जाएंगे। अरुण साव ने कहा कि SIR के दौरान ऐसे लोगों के नाम हटाए गए हैं जो मतदाता बनने के पात्र नहीं हैं जिनके नाम एक से अधिक स्थानों पर दर्ज हैं या जिनकी मृत्यु हो चुकी है। उन्होंने सवाल किया कि कांग्रेस आखिर ऐसे अपात्र मतदाताओं के नाम बचाने के लिए SIR का विरोध क्यों कर रही है। उप मुख्यमंत्री ने कांग्रेस पर चुनाव हारने की खीझ में कभी EVM कभी चुनाव आयोग और अब SIR को जिम्मेदार ठहराने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि मतदाता सूची में बड़ी संख्या में अपात्र लोगों के नाम थे जिन्हें हटाया गया है और कांग्रेस को इस पर स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए।