दर्द के इलाज में भारत के सामने दोहरी चुनौती है। एक ओर कैंसर समेत गंभीर बीमारियों से जूझ रहे लाखों मरीज पर्याप्त दर्द निवारण के अभाव में पीड़ा सहने को मजबूर हैं वहीं दूसरी ओर ओपिओइड दवाओं के बेतहाशा इस्तेमाल से गंभीर स्वास्थ्य संकट का खतरा है। ऐसे में भारत को सुरक्षित प्रभावी और ओपिओइड-मुक्त उपचार का विकल्प विकसित करना होगा।इसी दिशा में एम्स भोपाल की पेन मेडिसिन यूनिट मिनिमली इनवेसिव पेन एंड स्पाइन इंटरवेंशन्स (MIPSI) के जरिए नई उम्मीद जगा रही है। इस तकनीक में अल्ट्रासाउंड और एक्स-रे की मदद से दर्द के वास्तविक स्रोत की पहचान कर सटीक उपचार किया जाता है। इससे मरीजों को बड़ी सर्जरी से बचाने के साथ ही कई मामलों में उसी दिन अस्पताल से छुट्टी देना संभव हो रहा है।यूनिट के प्रभारी डॉ. अनुज जैन के अनुसार कैंसर मोटापे और गठिया के बढ़ते मामलों के कारण आने वाले समय में दर्द के उपचार की मांग तेजी से बढ़ेगी। एम्स भोपाल की यूनिट नौ वर्षों में हजारों मरीजों का उपचार कर चुकी है।एम्स भोपाल में 2 से 4 अक्टूबर तक इंडियन सोसाइटी ऑफ पेन फिजिशियन्स का 12वां राष्ट्रीय एवं चौथा अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन आयोजित हुआ। इसमें 100 से अधिक विशेषज्ञ और 200 से अधिक युवा चिकित्सक शामिल हुए । और आधुनिक दर्द उपचार की तकनीकों का प्रशिक्षण लिया। सेमिनार को लेकर हमारे संवाददाता हेमंत माली ने कार्यक्रम के सचिव डॉक्टर अनुज जैन से विस्तृत रूप से चर्चा की ।