उज्जैन में इन दिनों करीब 8 फीट ऊंची खड़े हनुमान की प्रतिमा सोशल मीडिया पर चर्चा का विषय बनी हुई है। सिंहस्थ 2028 की तैयारियों के बीच सड़क चौड़ीकरण के लिए मंदिर का बाहरी ढांचा तो हटा दिया गया लेकिन हनुमान प्रतिमा अपनी जगह से टस से मस नहीं हुई। प्रतिमा को हटाने की चार बार कोशिश की गई। हाइड्रोलिक क्रेन तक लगाई गई लेकिन हर कोशिश नाकाम रही। करीब डेढ़ फीट तक खुदाई करने के बावजूद प्रतिमा की नींव का पता नहीं चल सका। प्रतिमा हटाने को लेकर 30 अगस्त से विरोध भी जारी है। हालांकि प्रशासन का कहना है कि प्रतिमा हटाने की कोशिश नहीं की गई। वहीं मंदिर से जुड़े लोग वीडियो को इसका सबूत बता रहे हैं। मामला बढ़ने के बाद फिलहाल कार्रवाई रोक दी गई है और प्रतिमा की तकनीकी जांच कराई जा रही है। जियोलॉजिकल एक्सपर्ट के मुताबिक इतनी ताकतवर क्रेन बड़ी संरचनाओं को भी जड़ से उखाड़ सकती है। ऐसे में प्रतिमा के नहीं हिलने की एक संभावना यह हो सकती है कि मूर्ति और उसके नीचे की चट्टान एक ही रॉक का हिस्सा हों। हालांकि इसकी वास्तविक स्थिति डिटेल सर्वे के बाद ही साफ होगी। स्थानीय लोग खड़े हनुमान को ‘डॉक्टर हनुमान’ और मंदिर को ‘उज्जैन का एम्स’ कहते हैं। मान्यता है कि यहां बीमार बच्चों की मन्नतें पूरी होती हैं। प्रतिमा का वीडियो वायरल होने के बाद श्रद्धालुओं की संख्या भी बढ़ गई है और मध्यप्रदेश समेत कई राज्यों से लोग इसे चमत्कार मानकर दर्शन के लिए पहुंच रहे हैं। दरअसल सिंहस्थ 2028 को देखते हुए उज्जैन में बड़े स्तर पर विकास कार्य चल रहे हैं। कोयला फाटक से कंठाल सती गेट होते हुए छत्री चौक तक करीब 1.13 किलोमीटर लंबी सड़क का चौड़ीकरण किया जा रहा है। सड़क को करीब 15 मीटर चौड़ा किया जाना है। इस मार्ग पर कुल चार धार्मिक स्थल चौड़ीकरण की जद में आए हैं। प्रशासन के मुताबिक तीन धार्मिक स्थलों का व्यवस्थापन किया जा चुका है। वहीं खड़े हनुमान मंदिर को लेकर तकनीकी प्रक्रिया अभी जारी है। अब सबसे बड़ा सवाल यही है— क्या खड़े हनुमान की प्रतिमा के नीचे कोई प्राकृतिक चट्टान है या फिर इसके पीछे कोई और तकनीकी वजह? इसका जवाब अब एक्सपर्ट की जांच के बाद ही सामने आएगा। हालांकि प्रतिमा सुरक्षित रूप से नहीं हट सकी तो सड़क का डिजाइन बदलकर इसे बचाने का विकल्प भी विचाराधीन है.