मध्य प्रदेश की राजनीति में सरकारी आयोजनों और विधानसभा क्षेत्रों में मंत्री पुत्रों का दखल एक बार फिर चर्चा में है। हाल ही में ऊर्जा मंत्री राकेश शुक्ला की अनुपस्थिति में उनके पुत्र द्वारा सरकारी कार्यक्रम में हितग्राहियों को प्रमाण पत्र बांटने का वीडियो वायरल हुआ है। कांग्रेस नेता अभिनव बरोलिया ने इस पर तीखा हमला करते हुए कहा है कि अधिकारी भाजपा का बिल्ला जेब में रखकर काम कर रहे हैं। लेकिन आपको बता दे की यह रसूख नया नहीं है। इससे पहले पूर्व मुख्यमंत्री और अभी के केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान के विधानसभा क्षेत्र बुधनी में आयोजित विधायक खेल महोत्सव और क्रिकेट टूर्नामेंट्स में उनके बेटे कार्तिकेय सिंह चौहान का दबदबा जगजाहिर रहा है। उस समय भी नन्हे बालक के रूप में कार्तिकेय की राजनीतिक लॉन्चिंग को लेकर विपक्ष ने जमकर हंगामा किया था। चाहे वह बुधनी की पिच हो या भिंड-मुरैना के सरकारी मंच सवाल एक ही खड़ा होता है। क्या जनता द्वारा चुने गए प्रतिनिधियों की जगह उनके उत्तराधिकारी लेंगे? क्या प्रशासन अब मंत्रियों के साथ-साथ उनके परिजनों के आगे भी नतमस्तक है?