छत्तीसगढ़ विधानसभा में मनरेगा से जुड़े ‘जी राम जी’ मुद्दे पर सत्ता और विपक्ष के बीच तीखी नोकझोंक हुई। नेता प्रतिपक्ष डॉ. चरणदास महंत ने स्थगन प्रस्ताव लाते हुए आरोप लगाया कि सरकार गरीबों मजदूरों और आदिवासियों के रोजगार के अधिकार को कमजोर कर रही है। उन्होंने कहा कि अब काम पंचायतों की बजाय केंद्र के इशारे पर तय होंगे जिससे गरीबों को नुकसान होगा। विपक्ष की बात नहीं सुने जाने पर कांग्रेस विधायकों ने सदन से वॉकआउट कर दिया। वहीं उपमुख्यमंत्री विजय शर्मा ने आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि स्थगन प्रस्ताव प्रक्रिया के तहत तय होता है और सरकार मनरेगा के तहत काम देने के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने बताया कि ‘जी राम जी’ योजना में अधोसंरचना रोजगार और आजीविका पर फोकस किया जा रहा। राजधानी रायपुर में कांग्रेस का हल्लाबोल प्रदर्शन और विधानसभा घेराव कार्यक्रम जोरदार रहा। सचिन पायलट की मौजूदगी में मनरेगा बढ़ती महंगाई अफीम और बढ़ते क्राइम जैसे मुद्दों को लेकर हजारों कार्यकर्ता सड़कों पर उतरे। प्रदेशभर से पहुंचे कांग्रेस कार्यकर्ता शंकर नगर स्थित भारत माता चौक से विधानसभा की ओर कूच करने निकले। सुरक्षा के मद्देनजर पुलिस और यातायात विभाग अलर्ट रहा। भारत माता चौक से तेलीबांधा तालाब तक बैरिकेडिंग की गई और आम लोगों के लिए वैकल्पिक मार्ग बनाए गए। प्रदर्शन के दौरान पुलिस और कांग्रेस कार्यकर्ताओं के बीच झड़प भी हुई जिससे कुछ देर के लिए माहौल तनावपूर्ण हो गया। इस बीच नेता प्रतिपक्ष डॉ. चरणदास महंत ने भावुक अंदाज में कहा कि वे जनता के आंसू पोंछने निकले हैं और सरकार पर किसानों युवाओं व आम लोगों के मुद्दों की अनदेखी का आरोप लगाया। वहीं डिप्टी सीएम विजय शर्मा ने पलटवार करते हुए कहा कि कांग्रेस केवल ‘गांधी सरनेम’ पर राजनीति करती है जबकि भाजपा गांधीजी के विचारों पर काम करती है। उन्होंने कहा कि ‘जी-राम-जी’ योजना के जरिए अधोसंरचना रोजगार और आजीविका विकास को गति दी जा रही है और सरकार अपने संकल्प पर अडिग है छत्तीसगढ़ में धर्म स्वातंत्र्य विधेयक को लेकर सियासत तेज हो गई है। सत्ता और विपक्ष के बीच इस मुद्दे पर बयानबाजी तेज होती दिख रही है। पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने विधेयक को वापस लेने की मांग करते हुए सरकार पर राजनीति करने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि वर्ष 2006 में तत्कालीन मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह के कार्यकाल में यह विधेयक लाया गया था लेकिन 2006 से अब तक यह राष्ट्रपति के पास लंबित है और केंद्र ने इसे मंजूरी नहीं दी। बघेल ने कहा कि यह विषय केंद्र सरकार के अधिकार क्षेत्र में आता है और राज्यपाल को इसकी स्वीकृति देने का अधिकार नहीं है। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार इस मुद्दे का राजनीतिक लाभ लेना चाहती है जबकि आरक्षण समेत कई अन्य विधेयक भी लंबित हैं। वहीं डिप्टी सीएम विजय शर्मा ने कहा कि धर्म स्वातंत्र्य अधिनियम 2006 में पारित हुआ था लेकिन राज्य में लागू नहीं हो सका। उन्होंने बताया कि वर्तमान परिस्थितियों को देखते हुए पुराने प्रावधानों को वापस लेकर सभी की सहमति से नया प्रस्ताव सदन में लाया जाएगा। छत्तीसगढ़ विधानसभा में जल जीवन मिशन को लेकर विपक्ष के सवालों के बीच नगरीय प्रशासन मंत्री अरुण साव ने सरकार का पक्ष रखा। उन्होंने बताया कि नरेंद्र मोदी द्वारा वर्ष 2019 में शुरू की गई इस योजना का उद्देश्य हर ग्रामीण घर तक नल से शुद्ध पेयजल पहुंचाना है। मंत्री साव ने कहा कि पहले योजना की अवधि 2024 तक तय थी लेकिन 10 मार्च 2026 की कैबिनेट बैठक में इसे बढ़ाकर 2028 तक कर दिया गया है। उन्होंने इसे ग्रामीण हित में बड़ा फैसला बताया। उन्होंने जानकारी दी कि जल जीवन मिशन 2.0 के नए दिशानिर्देश जारी किए गए हैं जिनमें बेहतर संचालन संधारण जल संरक्षण और जनभागीदारी पर जोर दिया गया है। साथ ही योजना का कुल बजट बढ़ाकर 8.69 लाख करोड़ रुपये कर दिया गया है जिसमें केंद्र सरकार 3.59 लाख करोड़ रुपये देगी।सरकार का दावा है कि इस विस्तार से ग्रामीण क्षेत्रों में स्वच्छ पेयजल की उपलब्धता बढ़ेगी और लोगों के जीवन स्तर में सुधार होगा।