आजादी के बाद से चल रही ब्रिज की मांग जान हथेली में रखकर नदी पार कर रहे ग्रामीण खजरा स्कुल भवन चढ़ा भ्रष्ट्राचार की भेट डर के साए मे पढऩे को मजबूर छात्राएं ४ अन्य निजी स्कुलो की जांच के लिए एसडीएम को दी जिम्मेदारी ये तस्वीर है आजाद भारत की जहा आजादी के वर्षों बाद भी लोग बुनियादी सुविधाओं के लिये तरस रहै है। पुल के अभाव में लोग आज भी लकड़ी की नाव का सहारा लेकर दरिया के उस पार पहुँचते है। यह कोई 18वीं सदी की तस्वीर नहीं बल्कि डिजिटल इंडिया का सपना देखने वाले भारत की २१ वीं सदी की तस्वीर है। जहा आज भी एक केवटिया लोगो को अपनी नाव में नदी के इस पार से उस पार तक छोड़ आता है। मामला परसवाड़ा विधानसभा क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले बोरी और परसवाड़ा के बीच से गुजरने वाली घिसर्री नदीं पर हो रहे सफर का है। जहां नाव से गांव के किसान और मजदूर रोजाना नदीं पार करते है ओर ऐसे में जिला प्रशासन के खिलाफ लोगो का आक्रोश भी फूटता नजर आता है । सरकार एक ओर सब बड़ो और सब पढो के नारे का ढिंढौरा पीट रही है तो दूसरी ओर बच्चों को अच्छे भवन में शिक्षा मिले यह उद्देश्य को लेकर करोड़ों रुपए खर्च भी कर रही है। लेकिन यही सरकार के नौकरशाह अधिकारी स्कुली भवन को भ्रष्टाचार की भेट चढ़ाने मे कोई कोर कसर नही छोड़ रहे है। और इसी तरह का एक मामला बालाघाट जिले के बैहर की एकीकृत शासकीय उच्चतर माध्यमिक शाला खजरा का सामने आया है। जहां महज ५ साल पूर्व बने स्कूल भवन की दीवारों में दरार आ गए हैं और छत से पानी टपकता है। दीवार से कभी भी प्लास्टर गिर जाता है ऐसी स्थिति में वहां पढऩे वाले छात्र छात्राएं डर के साए में बैठकर पढऩे को मजबूर हैऔर जवाबदार कोई बड़ी अनहोनी होने का इंतजार कर रहे हैंए इसीलिए तो इस ओर ध्यान नहीं दे रहे हैं। स्कूल के प्राचार्य ने बताया कि तत् संबंध में विभाग को कई बार अवगत कराया गया है लेकिन ध्यान नहीं दिया जा रहा है। बालाघाट कलेक्टर डॉ गिरीश कुमार मिश्रा ने शनिवार को स्कूल संचालकों के साथ दूसरे चरण की बैठक की। दूसरे चरण में उन स्कूलों को बुलाया गया जो पहले शेष रह गए थे। साथ ही वे स्कूल जिन्होंने ऑनलाइन इंट्री नहीं कि थी। शनिवार को करीब १९ स्कूलों के साथ विस्तृत रूप से ड्रेसए फीस पुस्तकें और अन्य प्रबंधन के विषयों पर जानकारी ली गई। कलेक्टर डॉ मिश्रा ने स्कूल वार पृथक.पृथक रूप से बैठक कर स्पष्ठ रूप से कहा कि अभिभावकों पर किताबों का बोझ नहीं पढऩा चाहिए। अगर किताबें या पब्लिशर लगातार बदली जा रही है और चुनिंदा बुक स्टोर्स पर ही मिल रहीं है तो एमआरपी पर छूट मिलनी चाहिए। यह सुनिश्चित कराना संबंधित स्कूल प्रबंधन का ही कार्य है। एमपी ट्रांसको के प्रदेश के विभिन्न सब स्टेशनो में २००० पौधों के रोपण लक्ष्य के मुकाबले ३२६१ पौधों का रोपण किया गया हैं। सबस्टेशन लालबर्रा में अधीक्षण अभियंता श्री निजाम सिंह लोधी के मार्गदर्शन में सहायक अभियंता स्वाति बिसेन एवं अन्य द्वारा पौधारोपण किया गया। वृक्षारोपण को लेकर एम पी ट्रांसको के कार्मिकों के अलावा उनके परिजनों में भी गज़ब का उत्साह रहा। जिन्होंने एम पी ट्रांसको की रहवासी कालोनियों में बढ़ चढ़कर पौधारोपण किया। पौधरोपण करने वाले कार्मिकों और परिजनों ने शपथ लेकर स्वेच्छा से इन पौधों की देखरेख का जिम्मा भी लिया ।