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क्षेत्रीय
21-Dec-2023

#sanatjain #narendramodi #supremecourtofindia समय से 90 सेकंड परीक्षा खत्म कर देने पर छात्रों ने 12 लाख का मुआवजा मांगा है दक्षिण कोरिया के विद्यार्थी समूह ने 8 घंटे चलने वाली कॉलेज की प्रवेश परीक्षा को निर्धारित समय से 90 सेकंड पहले समाप्त कर दिए जाने परशासन से 12 लाख 77 हजार 938 रूपये का हर्जाना मांगा है.छात्रों ने सरकार के ऊपर मुकदमा दायर किया है. प्रत्येक विद्यार्थी ने 1 साल की ट्यूशन की लागत के बराबर राशि का हर्जाना देने की मांग की है. परीक्षार्थियों का कहना है कि दोबारा परीक्षा के लिए 1 साल की ट्यूशन फिर से लेनी पड़ेगी. 1 साल का समय उनका बर्बाद होगा. साउथ कोरिया के छात्र अपने अधिकारों के प्रति इतने सजग हैंकि उन्होंने 90 सेकंड पहले परीक्षा को समाप्त कर दिए जाने पर सरकार से हर्जाने की मांग कर ली है. भारत में हर काम के लिए कानून बना है. सरकार ने सैकड़ों कानून के हजारों नियम बने हुए हैं. कानून और नियमों की आड़ मे भारतीय नागरिकों को किस तरीके से प्रताड़ित किया जाता है.यह किसी से छिपा हुआ नहीं है. सरकारी कार्यालय में हर काम के लिए भारी रिश्वत देनी पड़ती है. बार-बार चक्कर लगाने पड़ते हैं. यदि रिश्वत नहीं दी जाती है तो कानून के मकडजाल में ऐसा फंसाया जाता हैकि उसका काम तो होता नहीं है. उल्टे अदालतों के चक्कर लगाते लगाते उसका पूरा जीवन गुजर जाता है. भारत में जो भी कानून बनाए जाते हैं. उसमें सरकार और प्रशासन के अधिकारियों और कर्मचारियों को कानून की परिधि से ऊपर रखा जाता है. यदि वह गलती जानबूझकर करते भी हैं तो नातो उनसे हर्जाना मांगा जा सकता है.नाही उनके ऊपर मुकदमा चलाया जा सकता है. कानून में सुरक्षा कवचसरकारी अधिकारी और कर्मचारियों की रक्षा करता है.जिसके कारण वह खुलकर भ्रष्टाचार करते हैं. पिछले 10 वर्षों में सरकार ने इतने कानून बना दिए हैं. जिनके ऊपर यह कानून लागू किया जा रहे हैं. कायदे से कानून और नियम का पालन करने के लिए उन्हें उनका कानून की पढ़ाई करनी चाहिए. सरकार आए दिन नियम बदल देती है. उसके लिए लगातार अपने आप को अपग्रेड रखना सीखना होगा. गलती होने पर जुर्माना ब्याज और सजा तीनों का प्रावधान किया गया है. लेकिन शासन और प्रशासन के ऊपर कोई नियम लागू नहीं होते हैं.कानून का पालन कैसे किया जाना है. इसका बकायदा प्रशिक्षण अब नागरिकों को लेना होगा.उसके बाद ही कोई काम कर सकते हैं . यदि वह सब सही कर भी ले यदि संबंधित काम के लिए सरकारी अधिकारियों और कर्मचारियों को नजराना पेश करने में कोई कोताही बरती है. तो उसे काम करने की अनुमति तो कभी मिलेगी नहीं.उल्टे नियम कायदे कानून के मकडजाल में फंसा कर उसका चलता हुआ काम बंद कर दिया जाएगा. उसे वर्षों तक अदालतों में प्रताड़ित किया जाएगा. साउथ कोरिया के छात्रों और नागरिकों में अपने अधिकार और कर्तव्यों को लेकर जिस तरीके की सजगता है. जब तक भारत के नागरिकों में यह सजगता नहीं आएगी.तब तक इसी तरीके से उनका शोषण होता रहेगा. भारत वैसे भी 33 लाख करोड़ देवी देवताओं का देश है. जहां हर देवी देवता अपने भक्तों की रक्षा करता है.शायद इसलिए लोग देवी देवताओं के भरोसे बैठे रहते हैं. उनके साथ जो भी होता हैवह यह मानकर चलते हैं कि यह हमारा भाग्य था. जो हमारे साथ ऐसा हो रहा है. महाराष्ट्र जैसे राज्य में सहकारिता आंदोलन इसलिए सफल रहा. वहां के नागरिक हमेशा सहकारी समितियां की बैठक में बढ़-चढ़कर भाग लेते रहे. अपने अधिकारों को लेकर बैठक में अपनी बात रखते थे. अपने अधिकारों और कर्तव्यों के प्रति सजग रहते थे. आज भी महाराष्ट्र में सबसे ज्यादा सहकारिता का प्रभाव है. यहां पर सहकारी संस्थाएं और सहकारी सदस्य अपने अधिकारों को लेकर जहां सजग होते हैं.वहीं कर्तव्यों का पालन करने में भी सजग हैं.नागरिकों में जब तक नैतिकता नहीं होगी.तब तक किसी भी कानून का पालन कराया जाना संभव नहीं हो सकता है.नैतिकता में कर्तव्य और अधिकार दोनों ही शामिल होते हैं. दक्षिण कोरिया के छात्रों से सीख लेने की जरूरत है. Subscribe Our Channel : / emstvindia .