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अंतर्राष्ट्रीय
05-Nov-2020

1 अमेरिका में राष्ट्रपति चुनाव कौन जीतेगा? जो बाइडेन या डोनाल्ड ट्रम्प। इसका जवाब संभवतरू आज शाम तक मिल जाए। फिलहाल, बाजी बाइडेन के हाथ लगती नजर आ रही है। न्यूयॉर्क टाइम्स के मुताबिक, वे 253 इलेक्टोरल वोट जीत चुके हैं। ट्रम्प के खाते में 214 वोट हैं। बाइडेन ने अपनी पार्टी के बराक ओबामा का 12 साल पुराना रिकॉर्ड तोड़ दिया। गुरुवार सुबह तक बाइडेन 7 करोड़ 10 लाख पॉपुलर वोट हासिल कर चुके थे। 2008 में ओबामा को 6 करोड़ 94 लाख 98 हजार 516 वोट मिले थे। 2 ट्रंप ने वोटों की गिनती पर सवाल उठाया है। इसके लिए ट्रंप सुप्रीम कोर्ट पहुंच गए हैं। ट्रंप ने ट्वीट कर कहा, कल जहां हम जीत रहे थे, वहां अचानक पीछे कैसे हो गए। पिछली रात मैं मजबूती के साथ लीड कर रहा था। कई राज्यों में डेमोक्रेट ने मतगणना पर कंट्रोल किया। वहीं, बिडेन ने कहा है कि हमें पूरा भरोसा है कि जीत हमारी ही होगी। मगर ये सिर्फ हमारी अकेले की जीत नहीं होगी। यह जीत अमेरिकी लोगों की होगी, हमारे लोकतंत्र की होगी, अमेरिका की होगी। दूसरी तरफ, ट्रंप के चुनावी अभियान ने पेंसिल्वेनिया, मिशीगन और जॉर्जिया सरकार पर मुकदमा दायर किया है। इन राज्यों में अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप अपने प्रतिद्वंद्वी जो बिडेन से पीछे रह गए हैं। 3 ट्रंप के चुनावी अभियान ने पेंसिल्वेनिया, मिशीगन और जॉर्जिया सरकार पर मुकदमा दायर किया है। इन राज्यों में ट्रंप अपने प्रतिद्वंद्वी जो बिडेन से पीछे रह गए हैं। ट्रंप के चुनावी अभियान ने यह भी कहा है कि वह विस्कॉन्सिन में दोबारा वोटों की गिनती करवाना चाहते हैं। राष्ट्रपति ट्रंप के कैंपेन मैंनेजर बिल स्टेपियन ने कहा, हम पेंसिल्वेनिया में जीत की घोषणा कर रहे हैं। यह किसी भावना के आधार पर नहीं बल्कि गणित के आधार पर है। अगर हम सभी कानूनी बैलट गिनते हैं तो हम जीतेंगे। 4 अमेरिकी चुनावों के लिए वोटों की गिनती जारी है, लेकिन डेमोक्रेटिक उम्मीदवार जो बिडेन ने एक रिकॉर्ड बना लिया है। बिडेन अमेरिका के इतिहास में पहले ऐसे राष्ट्रपति पद के उम्मीदवार बन चुके हैं, जिन्हें सबसे ज्यादा वोट मिले हैं। उन्होंने ओबामा का रिकॉर्ड तोड़ दिया है। बिडेन बहुमत से मात्र अब छह इलेक्टोरल वोट दूर हैं। बिडेन को 264 इलेक्टोरल कॉलेज सीट पर जीत हासिल हुई है जबकि राष्ट्रपति ट्रंप 214 पर ही बने हुए हैं। बिडेन को 50.4 फीसदी वोट मिले हैं वहीं ट्रंप को 48 फीसदी वोट मिले हैं। 5 अमेरिका में भारत की तरह चुनाव आयोग जैसी संस्था नहीं है। वहीं हर राज्य के अपने अलग कानून हैं, ऐसे में सभी राज्य इनका पालन करते हुए मतगणना करवाते हैं। यही वजह है वहां कौन जीता और किसे कितने वोट मिले इसकी आधिकारिक जानकारी सरकारी एजेंसी के मार्फत जारी नहीं होती। इसके बजाय फॉक्स न्यूज और एसोसिएटेड प्रेस जैसी समाचार संगठनों द्वारा जारी रुझानों से परिणाम का आकलन किया जाता है। इनके पास देशभर की मतगणना के आंकड़ों का संकलन होता है जिनके आधार पर वे विभिन्न राज्यों में प्रत्याशियों की स्थिति को सामने रखते हैं और किसे कितने इलेक्टोरल कॉलेज के वोट मिले हैं बताते हैं। 6 हीरा कारोबारी नीरव मोदी को देश में प्रत्यर्पित करने की दिशा में भारतीय अफसरों को एक कामयाबी मिली है। ब्रिटिश अदालत ने नीरव के खिलाफ सबूत स्वीकार कर लिए हैं। इस फैसले से पहले जिला न्यायाधीश सैमुअल गूजी ने वेस्टमिंस्टर मजिस्ट्रेट अदालत में सीबीआई और प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) द्वारा पेश कुछ गवाहों के बयानों की स्वीकार्यता के खिलाफ और पक्ष में दलीलें सुनीं। नीरव मोदी 1 दिसंबर तक रिमांड में भेज दिया गया। 7 अमेरिका में राष्ट्रपति चुनाव के आखिरी नतीजों में देरी के कारण कई शहरों में दोनों पक्षों के समर्थकों के बीच झड़प हो गई। वॉशिंगटन में राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प के खिलाफ अश्वेतों का आक्रोश दिखाई दिया। यहां हजारों लोग व्हाइट हाउस के पास ब्लैक लाइव मैटर प्लाजा पर एकजुट हुए। पिछले कुछ दिनों से यह जगह अश्वेतों के आंदोलन का प्रमुख स्थान बना हुआ है। इन लोगों ने ट्रम्प के खिलाफ नारे लगाए। सड़कें जाम कीं और पटाखे फोड़े। 8 भारतीय सेना के प्रमुख जनरल मनोज मुकुंद नरवणे बुधवार को 3 दिन की यात्रा पर नेपाल की राजधानी काठमांडू पहुंचे। नरवणे नेपाल के आर्मी चीफ जनरल पूर्ण चंद्र थापा के न्यौते पर वहां गए हैं। नेपाल की राष्ट्रपति विद्या देवी भंडारी आज नरवणे को नेपाल सेना ऑनरेरी जनरल की रैंक से सम्मानित करेंगी। 1950 से ही ऐसी परंपरा चली आ रही है। इसमें भारत भी नेपाली सेना के चीफ को भारतीय सेना के जनरल की ऑनरेरी रैंक देता है। 9 अमेरिकी चुनावों में फिल्म मेकर मीरा नायर के बेटे ने इतिहास रच दिया। जोहरान ममदानी पहले साउथ एशियन हैं, जिन्होंने न्यूयॉर्क स्टेट असेम्बली में सीट जीती है। जोहरान को न्यूयॉर्क के 36वें असेम्बली जिले एस्टोरिया (क्वींस का पड़ोसी) के लिए बिना विरोध चुन लिया गया। युगांडा के कम्पाला में जन्मे जोहरान जब 7 साल के थे, तब उनका परिवार न्यूयॉर्क चला गया। जोहरान वहीं पले-बढ़े। अपनी जीत के बारे में जोहरानी ने लिखा, ष्ये ऑफिशियल है कि हम जीत गए हैं। मैं अमीरों पर टैक्स लगाने, बीमारों को ठीक करने, गरीबों का घर बसाने और समाजवादी न्यूयॉर्क बनाने के लिए अल्बानी जा रहा हूं। लेकिन, मैं इसे अकेले नहीं कर सकता। एक बड़े आंदोलन की जरूरत होगी।ष्