महासमुंद जिले में आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं और सहायिकाओं ने अपनी पांच सूत्रीय मांगों को लेकर एक दिवसीय हड़ताल की। संयुक्त मंच के बैनर तले जिलेभर से महिला कर्मी अटल परिसर में जुटीं और राज्य सरकार के खिलाफ नारेबाजी की।सुबह 10 बजे से धरना देने के बाद कार्यकर्ताओं ने रैली निकाली और कलेक्टर कार्यालय पहुंचीं। यहां अपर कलेक्टर को मुख्यमंत्री महिला एवं बाल विकास मंत्री और विभागीय सचिव के नाम ज्ञापन सौंपा गया। स्थानीय समस्याओं को लेकर सीडीपीओ को भी अलग से ज्ञापन दिया गया। बिलासपुर में अपनी तीन सूत्रीय मांगों को लेकर पटवारियों ने मोर्चा खोल दिया है। बड़ी संख्या में पटवारी कोन्हेर गार्डन में जुटे और रैली निकालकर कलेक्टर कार्यालय पहुंचे। यहां उन्होंने शासन के खिलाफ प्रदर्शन करते हुए अपनी मांगों को लेकर आवाज बुलंद की।पटवारियों की प्रमुख मांगों में पीवीएएफ व्यवस्था का विरोध वेतन विसंगति दूर करना और पदोन्नति शामिल है। उनका कहना है कि पीवीएएफ व्यवस्था में तकनीकी और मैदानी स्तर पर कई परेशानियां हैं। वहीं वर्ष 2017 के बाद नियुक्त पटवारियों और पुराने कर्मचारियों के वेतन में अंतर को लेकर भी उन्होंने सवाल उठाए।पटवारियों का कहना है कि राजस्व विभाग में दूसरे पदों पर पदोन्नति के अवसर हैं लेकिन उनके लिए यह व्यवस्था सीमित है। आंदोलनकारियों ने चेतावनी दी है कि जब तक मांगों का समाधान नहीं होता हड़ताल जारी रहेगी। इससे राजस्व से जुड़े कामकाज पर असर पड़ने की आशंका है। कैबिनेट के धान खरीदी से जुड़े फैसलों को लेकर PCC चीफ दीपक बैज ने राज्य सरकार पर निशाना साधा है। 360 नए उपार्जन केंद्र शुरू करने के फैसले पर सवाल उठाते हुए उन्होंने कहा कि सिर्फ केंद्रों की संख्या बढ़ाने से किसानों को क्या फायदा होगा सरकार को यह स्पष्ट करना चाहिए।दीपक बैज ने पूछा कि क्या इन नए केंद्रों पर किसानों से 3358 रुपये प्रति क्विंटल की दर से धान खरीदा जाएगा? क्या किसानों से 21 क्विंटल प्रति एकड़ के हिसाब से धान की खरीदी होगी और क्या खरीदी समर्थन मूल्य के अनुरूप की जाएगी?उन्होंने पंचायत भवनों में काउंटर खोलकर किसानों को नकद भुगतान की व्यवस्था को लेकर भी सरकार से सवाल किया। दीपक बैज ने उपमुख्यमंत्री अरुण साव से इन सभी सवालों का जवाब देने की मांग करते हुए कहा कि सरकार को किसानों के हित में धान खरीदी की व्यवस्था और भुगतान को लेकर स्पष्ट जानकारी देनी चाहिए। 1 नवंबर को दिल्ली में होने वाली कांग्रेस की रैली को लेकर PCC चीफ दीपक बैज ने बड़ा दावा किया है। उन्होंने भाजपा नेताओं को रैली में शामिल होने का न्योता देते हुए कहा कि वे एयरपोर्ट या सड़क पर खड़े होकर छत्तीसगढ़ से दिल्ली जाने वाले कांग्रेस कार्यकर्ताओं की संख्या गिन सकते हैं।दीपक बैज ने दावा किया कि रैली में छत्तीसगढ़ से हजारों की संख्या में कांग्रेस कार्यकर्ता और आम लोग शामिल होंगे। उन्होंने आरोप लगाया कि रैली को लेकर केंद्र सरकार और भाजपा में घबराहट है और उनकी बौखलाहट सामने आ रही है।बैज के मुताबिक रैली में कथित ‘वोट चोरी’ के मुद्दे को प्रमुखता से उठाया जाएगा। साथ ही मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग बैलेट पेपर से चुनाव कराने और SIR के जरिए मतदाता सूची से नाम हटाने की प्रक्रिया बंद करने की मांग भी उठाई जाएगी। कुपोषण के मुद्दे पर कांग्रेस के आरोपों को लेकर उपमुख्यमंत्री अरुण साव ने पलटवार किया है। उन्होंने कहा कि केंद्र और राज्य सरकार दोनों ही कुपोषण के खिलाफ गंभीरता से काम कर रही हैं और पिछले तीन वर्षों में इस दिशा में उल्लेखनीय काम हुआ है।अरुण साव ने दावा किया कि राज्य में कुपोषण से होने वाली मृत्यु दर में कमी आई है। उन्होंने कहा कि स्वास्थ्य विभाग के आंकड़ों से भी स्पष्ट है कि राज्य में कुपोषण धीरे-धीरे लगातार कम हुआ है और सरकार ने इसे लेकर कई महत्वपूर्ण प्रयास किए हैं।कांग्रेस के आरोपों को अरुण साव ने निराधार बेबुनियाद और राजनीति से प्रेरित बताया। उन्होंने कहा कि सरकार कुपोषण के खिलाफ लगातार काम कर रही है और इसके सकारात्मक परिणाम सामने आ रहे हैं। कांग्रेस की 1 नवंबर को दिल्ली में होने वाली रैली को लेकर भाजपा के वरिष्ठ विधायक अजय चंद्राकर ने निशाना साधा है। उन्होंने कांग्रेस के आंदोलन को बड़ा आंदोलन मानने से इनकार करते हुए कहा कि कांग्रेस की स्थिति अब एक क्षेत्रीय दल जैसी हो गई है।अजय चंद्राकर ने कहा कि कांग्रेस को न्यायपालिका से लेकर चुनाव आयोग जैसी संवैधानिक संस्थाओं पर भी भरोसा नहीं है। उन्होंने सवाल उठाया कि जब देश की व्यवस्थाओं पर ही भरोसा नहीं है तो राजनीति किस उद्देश्य से की जा रही है। चंद्राकर ने आरोप लगाया कि कांग्रेस अराजकता पैदा करने की राजनीति कर रही है।उन्होंने यह भी कहा कि दिल्ली में होने वाले आंदोलन से व्यापारियों को परेशानी हो रही है और हिंदू धर्म के बड़े त्योहारों के दौरान लोगों को प्रभावित किया जा रहा है। वहीं कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे की विवादित टिप्पणी को लेकर चंद्राकर ने कहा कि उसकी देशभर में निंदा हो चुकी है और अब उस मुद्दे को यहीं खत्म कर देना चाहिए। उन्होंने कहा कि उस बयान को बार-बार दोहराने की जरूरत नहीं है।