1. RBI ने ब्याज दरें नहीं बदलीं EMI में राहत नहीं अगर आप सस्ते होम ऑटो या पर्सनल लोन का इंतजार कर रहे हैं तो फिलहाल राहत नहीं मिलेगी। भारतीय रिजर्व बैंक ने रेपो रेट 5.25 प्रतिशत पर ही बरकरार रखी है। तीन दिन चली मॉनिटरी पॉलिसी कमेटी की बैठक के बाद RBI गवर्नर संजय मल्होत्रा ने कहा कि वैश्विक अनिश्चितता और महंगाई के दबाव को देखते हुए ब्याज दरों में कोई बदलाव नहीं किया गया है। इसका मतलब है कि फिलहाल लोन की EMI कम नहीं होगी। हालांकि फिक्स्ड डिपॉजिट यानी FD पर मिलने वाले ब्याज में भी फिलहाल कोई कटौती नहीं होगी। 2. शेयर बाजार में तेजी सेंसेक्स 400 अंक चढ़ा शेयर बाजार में आज मजबूती देखने को मिली। सेंसेक्स करीब 400 अंकों की बढ़त के साथ 78 हजार 800 के स्तर पर कारोबार करता दिखा जबकि निफ्टी भी 20 अंक चढ़कर 24 हजार 650 के करीब पहुंच गया। बाजार में सबसे ज्यादा खरीदारी रियल्टी ऑटो और बैंकिंग सेक्टर के शेयरों में रही। निवेशकों की सकारात्मक धारणा के चलते शुरुआती कारोबार में बाजार हरे निशान में बना रहा। 3. मेटा की ग्लोबल टीम को केंद्र सरकार का समन भारत सरकार ने फेसबुक और इंस्टाग्राम की मूल कंपनी मेटा की ग्लोबल टीम को समन जारी किया है। 5 और 6 अगस्त को होने वाली बैठक में सरकार चाइल्ड सेक्सुअल एब्यूज कंटेंट पर नियंत्रण में चूक फर्जी और सिंथेटिक AI कंटेंट के प्रसार तथा नेताओं और वीआईपी के वेरिफाइड अकाउंट्स पर हुई गलत कार्रवाई जैसे गंभीर मुद्दों पर जवाब मांगेगी। इलेक्ट्रॉनिक्स और आईटी मंत्रालय ने मेटा के अब तक के जवाबों को संतोषजनक नहीं माना है। 4. बिना थर्ड पार्टी बीमा वाले वाहनों को पेट्रोल रोकने पर सुप्रीम कोर्ट के निर्देश सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार और बीमा नियामक इरडा को ऐसा पायलट प्रोजेक्ट तैयार करने का निर्देश दिया है जिसमें बिना वैध थर्ड पार्टी बीमा वाले वाहनों को पेट्रोल न दिया जाए। अदालत ने नई कारों के लिए अनिवार्य थर्ड पार्टी बीमा की अवधि 3 साल से बढ़ाकर 4 साल और नए दोपहिया वाहनों के लिए 5 साल से बढ़ाकर 6 साल करने का भी निर्देश दिया है। कोर्ट का कहना है कि सड़क दुर्घटना पीड़ितों के हितों की रक्षा के लिए यह कदम जरूरी है। 5. UPI पर फिर लग सकती है फीस सरकार कर रही कानून में बदलाव की तैयारी देश में डिजिटल भुगतान करने वालों के लिए आने वाले समय में बड़ा बदलाव हो सकता है। वित्त मंत्रालय ने पेमेंट एंड सेटलमेंट सिस्टम्स एक्ट में संशोधन का प्रस्ताव दिया है। यदि यह बदलाव लागू होता है तो सरकार को भविष्य में UPI सहित कुछ डिजिटल पेमेंट माध्यमों पर मर्चेंट डिस्काउंट रेट यानी MDR लागू करने का अधिकार मिल जाएगा। फिलहाल UPI लेनदेन पर कोई शुल्क नहीं लगता लेकिन नए प्रावधान के बाद सरकार यह तय कर सकेगी कि किन डिजिटल भुगतान सेवाओं को मुफ्त रखा जाए और किन पर शुल्क लिया जाए।