सडक़ पर लग रही गुजरी आवागमन में परेशानी अतिक्रमण हटाने जिम्मेदार मौन पेट्रोल पम्प संचालकों की बैठक में नई कार्यकारिणी गठित चरवाहा सम्मेलन में वन संरक्षण और वन्यजीव सुरक्षा का संदेश शहर के गुजरी बाजार में सब्जी विक्रेताओं द्वारा सडक़ के दोनों छोर पर सब्जी दुकानें लगाई जाती है। इससे दो पहिया वाहन चालकों को आवागमन में परेशानी का सामना करना पड़ता है। वैसे भी गुजरी बाजार की सडक़ सकरी है बावजूद सडक़ पर ही गुजरी लगने से यातायात व्यवस्था प्रभावित होती है और आए दिन विवाद की स्थिति भी बनती है। सब्जी लेने वाले ग्राहकों द्वारा भी सडक़ में वाहन खड़ा कर दिया जाता है इससे आने-जाने वालों को परेशानियों का सामना करना पड़ता है। काफी पहले नगरपालिका प्रशासन व राजस्व विभाग द्वारा अतिक्रमण हटाकर सडक़ पर दुकानें नहीं लगाने की हिदायत दी थी। लेकिन आज भी गुजरी बाजार में आस-पास सडक़ पर ही दुकानें लगाई जा रही है। इससे दुर्घटना की संभावना भी बनी रहती है। पेट्रोल पम्प संचालकों की समस्याओं व मांगों को लेकर एकजुटता के साथ आवाज बुलंद करने की मंशा से जिले के पेट्रोल पंप संचालकों की ८ जून सोमवार को गोंदिया रोड स्थित एक होटल में महत्वपूर्ण बैठक आयोजित हुई। बैठक में पेट्रोलियम व्यवसाय से जुड़े विभिन्न मुद्दों पर विस्तार से चर्चा की गई व संगठन को सशक्त एवं प्रभावी बनाने के लिए नई जिला जिला कार्यकारिणी का गठन किया गया। इस दौरान सर्व सम्मति से गुलाब सिंह उईके जिलाध्यक्ष मनोनीत किया गया। इसके साथ ही संगठन के अन्य पदाधिकारियों एवं कार्यकारिणी सदस्यों की भी घोषणा की गई। इसमें मोनू खंडेलवाल अशोक मंडलेकर विकास हजारी को उपाध्यक्ष एवं द्रोण कुमार डोंगरे को सचिव व कोषाध्यक्ष चैनसिंह बैस व मोह. अब्दुल कादिर को सह-सिचव की जिम्मेदारी सौंपी गई है। चरेगांव क्षेत्र के वन परिक्षेत्र में गाय चराने वाले चरवाहों के लिए विशेष सम्मेलन का आयोजन किया गया जिसमें बड़ी संख्या में चरवाहा समुदाय के लोगों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। कार्यक्रम का उद्देश्य वन क्षेत्रों में पशु चराने वाले लोगों को वन विभाग के नियमों जंगल संरक्षण वन्यजीव सुरक्षा और पर्यावरण संरक्षण के प्रति जागरूक करना था। सम्मेलन में वन विभाग के अधिकारियों ने शासन के निर्देशों वन संरक्षण के महत्व तथा विभागीय गतिविधियों की विस्तृत जानकारी दी। कार्यक्रम को संबोधित करते हुए रेंजर शिवम पुरी गोस्वामी ने कहा कि जंगल प्राकृतिक संपदा का अमूल्य खजाना हैं और इनके संरक्षण में स्थानीय ग्रामीणों तथा चरवाहों की महत्वपूर्ण भूमिका है। उन्होंने अवैध कटाई वन्यजीव शिकार और आगजनी जैसी गतिविधियों को रोकने में जनसहयोग की आवश्यकता पर जोर दिया। गौ-पालन भैंस पालन बकरी पालन सूअर पालन और मुर्गी पालन जैसी रोजगारोन्मुखी गतिविधियों को बढ़ावा देने के लिए सरकार लगातार प्रयास कर रही है। वर्ष 2026 को कृषि वर्ष घोषित किए जाने के बाद प्रशासन कृषि और इससे जुड़े विभागों की नियमित समीक्षा कर रहा है। उद्देश्य है कि पशुपालक किसानों को बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराकर उनकी आय में वृद्धि की जाए। आचार्य विद्यासागर योजना मुख्यमंत्री डेयरी प्लस योजना और डॉ. भीमराव अंबेडकर कामधेनु योजना जैसी महत्वाकांक्षी योजनाओं के माध्यम से प्रदेश को दुग्ध उत्पादन के क्षेत्र में अग्रणी बनाने का लक्ष्य रखा गया है। इसी कड़ी में पशुपालन विभाग के अधिकारियों की लगातार समीक्षा बैठकें हो रही हैं। नवपदस्थ अधिकारी डॉ. परते भी क्षेत्रीय दौरों के जरिए कार्यों की निगरानी और जवाबदेही सुनिश्चित कर रहे हैं।