शेयर बाजार में भारी गिरावट सेंसेक्स 1000 अंक टूटा देश के शेयर बाजार में आज यानी 11 मई को बड़ी गिरावट देखने को मिली। सेंसेक्स करीब 1000 अंक टूटकर 76300 के स्तर पर कारोबार करता नजर आया जबकि निफ्टी भी 300 अंकों से ज्यादा फिसलकर 23900 के आसपास पहुंच गया। बाजार में सबसे ज्यादा दबाव ऑटो बैंकिंग और रियल्टी सेक्टर के शेयरों में देखा गया। निवेशकों में कमजोर वैश्विक संकेतों और बढ़ती आर्थिक चिंताओं के चलते बेचैनी बनी हुई है। तेल कंपनियों को बड़ा झटका रोज ₹1700 करोड़ का नुकसान देश की तेल कंपनियों पर लगातार आर्थिक दबाव बढ़ता जा रहा है। सूत्रों के मुताबिक पेट्रोलियम कंपनियों को हर दिन करीब 1700 करोड़ रुपए का नुकसान उठाना पड़ रहा है। पिछले 10 हफ्तों में यह नुकसान 1 लाख करोड़ रुपए से ज्यादा पहुंच चुका है। वहीं मार्केट कैपिटलाइजेशन के लिहाज से देश की 10 बड़ी कंपनियों में से 4 कंपनियों की वैल्यू बीते सप्ताह करीब 1 लाख करोड़ रुपए घट गई। इस दौरान सबसे ज्यादा नुकसान SBI को हुआ। 2036 तक बदलेगी भारत की तस्वीर बुजुर्ग आबादी 20 करोड़ के पार भारत में आने वाले 10 वर्षों में सामाजिक और आर्थिक तस्वीर तेजी से बदलने वाली है। अनुमान है कि साल 2036 तक देश में बुजुर्गों की आबादी 20 करोड़ से ज्यादा हो जाएगी जो 2011 के मुकाबले लगभग दोगुनी होगी। छोटे होते परिवार और बढ़ती औसत उम्र के बीच रिटायरमेंट प्लानिंग और पेंशन की अहमियत बढ़ गई है। विशेषज्ञों का कहना है कि पेंशन केवल निवेश नहीं बल्कि भविष्य की आर्थिक सुरक्षा की मजबूत दीवार है। इसी को ध्यान में रखते हुए PFRDA अब NPS को आम लोगों के लिए और अधिक सरल व सुलभ बनाने की तैयारी कर रहा है। संपत्ति सुरक्षा को लेकर बढ़ी चिंता बीमा बना बड़ी जरूरत देश में संपत्ति सुरक्षा को लेकर जागरूकता अब भी बेहद कम है। आग बाढ़ या भूकंप जैसी आपदाएं किसी भी मध्यमवर्गीय परिवार को आर्थिक संकट में डाल सकती हैं। ऐसे में 2026 का बड़ा संदेश यही माना जा रहा है कि संपत्ति बनाना जितना जरूरी है उसे बीमा सुरक्षा देना उससे भी ज्यादा जरूरी है। नोएडा के कारोबारी विराज का उदाहरण इसकी बड़ी मिसाल है जिन्होंने दुकान के इंटीरियर और एसी पर लाखों रुपए खर्च किए लेकिन इंश्योरेंस को गैरजरूरी समझकर नजरअंदाज कर दिया। विशेषज्ञों का कहना है कि एक छोटी लापरवाही भविष्य में भारी नुकसान का कारण बन सकती है। रोजमर्रा के सामान हो सकते हैं महंगे FMCG कंपनियां बढ़ाएंगी दाम आम जनता को जल्द महंगाई का एक और झटका लग सकता है। साबुन डिटर्जेंट बिस्कुट और पैकेट बंद खाद्य पदार्थ जैसे रोजमर्रा के सामान महंगे होने की संभावना बढ़ गई है। कच्चे तेल की कीमतों में बढ़ोतरी पैकेजिंग लागत और ईंधन खर्च बढ़ने से FMCG कंपनियों के मुनाफे पर दबाव बना हुआ है। इसी कारण कंपनियां चरणबद्ध तरीके से उत्पादों की कीमतें बढ़ाने की तैयारी कर रही हैं। इसका सीधा असर आम लोगों की जेब पर पड़ सकता है।