1 डॉलर की कीमत 95.20 रुपए हुई इससे महंगाई बढ़ने का खतरा भारतीय रुपया आज यानी 30 अप्रैल को डॉलर के मुकाबले 95.20 के रिकॉर्ड निचले स्तर पर आ गया है। मिडिल ईस्ट युद्ध और एनर्जी सप्लाई रुकावटों से यह गिरावट आई। विदेशी ब्रोकरेज फर्म बर्नस्टीन के मुताबिक ईरान युद्ध जारी रहा तो रुपया 98 तक जा सकता है। विदेशी निवेशकों (FPI) की लगातार बिकवाली और वैश्विक स्तर पर बढ़ते व्यापारिक तनाव की वजह से रुपए में यह गिरावट देखी जा रही है। साल 2026 की शुरुआत से ही रुपया दबाव में है। पिछले साल दिसंबर 2025 में पहली बार रुपया 90 के स्तर के पार गया था। सेंसेक्स में 1000 अंक की गिरावट शेयर बाजार में आज यानी 30 अप्रैल को गिरावट है। सेंसेक्स 1000 अंक से ज्यादा की गिरावट के साथ 76300 के स्तर पर कारोबार कर रहा है। वहीं निफ्टी में भी करीब 350 अंक की गिरावट है ये 23800 के स्तर पर कारोबार कर रहा है। ऑटो मेटल बैंकिंग और रियल्टी शेयर्स में ज्यादा गिरावट है। सोना ₹679 बढ़कर ₹1.49 लाख पर पहुंचा सोने-चांदी के दाम में आज यानी 29 अप्रैल को बढ़त है। इंडिया बुलियन एंड ज्वेलर्स एसोसिएशन (IBJA) के अनुसार 10 ग्राम 24 कैरेट सोना 679 रुपए बढ़कर 148652 रुपए पर पहुंच गया है। इससे पहले इसकी कीमत 147973 रुपए प्रति 10 ग्राम थी। वहीं एक किलो चांदी 582 रुपए बढ़कर 236882 रुपए पर पहुंच गई है। इससे पहले 30 अप्रैल को इसकी कीमत 236300 लाख रुपए प्रति किलो थी। राजीव बजाज बोर्ड से इस्तीफा दे रहे बजाज फाइनेंस ने वित्त वर्ष 2026 की चौथी तिमाही (Q4) में ₹5465 करोड़ का शुद्ध मुनाफा यानी नेट प्रॉफिट कमाया है। पिछले साल की इसी तिमाही के ₹4480 करोड़ के मुकाबले इसमें 22% की बढ़ोतरी दर्ज की गई है।कंपनी ने अच्छे नतीजों के साथ ही यह भी जानकारी दी है कि राजीव बजाज बोर्ड से इस्तीफा दे रहे हैं। कंपनी के मुनाफे में इस उछाल की बड़ी वजह बैड लोन (फंसे हुए कर्ज) के लिए किए जाने वाले प्रोविजन में कमी आना है। पेट्रोल ₹14 नुकसान में बेच रहीं तेल कंपनियां इंटरनेशनल मार्केट में कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों के बावजूद रिटेल रेट न बढ़ने से कंपनियों को हर एक लीटर पेट्रोल और डीजल पर घाटा हो रहा है। रेटिंग एजेंसी इक्रा के मुताबिक तेल कंपनियां पेट्रोल पर ₹14 और डीजल पर ₹18 प्रति लीटर का नुकसान झेल रही हैं। मिडिल ईस्ट में जारी तनाव के कारण सप्लाई चैन प्रभावित हुई है जिससे कच्चे तेल के दाम तेजी से बढ़े हैं। इससे तेल कंपनियों पर बोझ बढ़ रहा है। यही नहीं रसोई गैस के लिए भी सरकार पर ₹80000 करोड़ का बोझ बढ़ रहा है।