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अंतर्राष्ट्रीय
30-Mar-2026

जबलपुर में पेयजल की गुणवत्ता को लेकर National Green Tribunal (NGT) ने सख्त रुख अपनाया है। NGT ने शहर में घरों तक सप्लाई हो रहे पानी और पुरानी पाइपलाइन की जांच के आदेश दिए हैं। इस मामले में NGT ने शासन स्तर के सचिव कलेक्टर जबलपुर नगर निगम कमिश्नर और अधिकारियों की एक कमेटी गठित की है जिसे एक महीने के भीतर रिपोर्ट पेश करने के निर्देश दिए गए हैं। यह कार्रवाई नागरिक उपभोक्ता मार्गदर्शक मंच की याचिका पर हुई है जिसमें दावा किया गया कि शहर में सप्लाई हो रहा करीब 47% पानी पीने योग्य नहीं है और घरों तक पहुंचने वाली पाइपलाइन 40-50 साल पुरानी हो चुकी है। अब इस जांच रिपोर्ट पर सभी की नजरें टिकी हैं जिससे शहर की जल व्यवस्था में सुधार की उम्मीद जताई जा रही है। जबलपुर में महापौर जगत बहादुर सिंह अन्नू ने वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए करीब 2200 करोड़ रुपए का निगम इतिहास का सबसे बड़ा बजट पेश किया। इस बजट में शहर को महानगर बनाने का रोडमैप रखा गया है। महापौर ने बताया कि पिछले साढ़े तीन साल में 2600 करोड़ के विकास कार्य किए गए हैं जबकि आने वाले डेढ़ साल में 3000 करोड़ के कामों का भूमिपूजन होगा। खास बात यह रही कि नगर निगम ने इस दौरान कोई कर्ज नहीं लिया। बजट में सीवर जल सप्लाई तालाब विकास बाढ़ नियंत्रण हाउसिंग और इंफ्रास्ट्रक्चर पर बड़ा फोकस रखा गया है। साथ ही 100 एसी बसें बायोगैस प्लांट पार्किंग पौधारोपण और स्मार्ट सिटी जैसी योजनाएं भी शामिल हैं। महापौर के मुताबिक यह बजट सिर्फ आय-व्यय नहीं बल्कि जबलपुर के भविष्य और आत्मनिर्भरता का रोडमैप है। थाना शहपुरा भिटौनी क्षेत्र के अंतर्गत ग्राम शहपुरा में मशहूर चॉकलेट कंपनी कैडबरी डेरी मिल्क की एक बड़ी लापरवाही का मामला प्रकाश में आया है। यहाँ एक मासूम बच्चे के स्वास्थ्य के साथ खिलवाड़ करने वाली घटना सामने आई है जहाँ दुकान से खरीदी गई ब्रांडेड चॉकलेट के अंदर फफूंद और कीड़े लगे हुए पाए गए। जानकारी के अनुसार कक्षा 8वीं में पढ़ने वाले एक छात्र ने स्थानीय दुकान से 55 रुपये मूल्य की कैडबरी डेरी मिल्क चॉकलेट खरीदी थी। जब पैकेट खोला गया तो चॉकलेट की स्थिति देखकर बच्चा और उसके परिजन दंग रह गए। चॉकलेट पूरी तरह से फफूंद से ढकी हुई थी और उसमें जीवित कीड़े रेंग रहे थे। ​हैरानी की बात यह है कि चॉकलेट के पैकेट पर उसकी एक्सपायरी डेट 8 जून 2026 अंकित है यानी कंपनी के दावों के अनुसार उत्पाद अभी पूरी तरह सुरक्षित होना चाहिए था। इसके बावजूद इतनी खराब गुणवत्ता की चॉकलेट बाजार में बिक्री के लिए भेजी गई। इस घटना का वीडियो भी सोशल मीडिया पर सामने आया है जिसमें स्पष्ट रूप से चॉकलेट के अंदर फफूंद और कीड़े देखे जा सकते हैं। इस घटना ने खाद्य सुरक्षा और नामी कंपनियों के गुणवत्ता मानकों पर बड़े सवालिया निशान खड़े कर दिए हैं। स्थानीय नागरिकों ने इस संबंध में प्रशासन से सख्त कार्रवाई की मांग की है ताकि बच्चों के स्वास्थ्य के साथ होने वाले ऐसे खिलवाड़ को रोका जा सके।