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क्षेत्रीय
05-Mar-2025

मध्य प्रदेश के टाइगर जिला के रूप में पहचाने जाने वाले बालाघाट में वन विभाग की लापरवाही के कारण एक 5 वर्षीय बाघ की मौत हो गई। वन परिक्षेत्र अधिकारी के अनुसार बाघ को जीवित पाया गया था लेकिन उसकी आहार नली टूट चुकी थी जिससे वह भूखा रह गया और अंततः उसकी मृत्यु हो गई।घटना कटंगी वन परिक्षेत्र के कोड़मी बीट की है जहां झाड़ियों के बीच फंसे इस बाघ को देखकर वन विभाग ने कान्हा और पेंच के अधिकारियों से संपर्क किया लेकिन किसी कारणवश वे समय पर नहीं पहुंच सके। चिकित्सकों के मुताबिक बाघ करीब 15 दिन पहले फंदे में फंसा था लेकिन वनकर्मियों को इस बात की भनक तक नहीं लगी।वन परिक्षेत्र अधिकारी ने दावा किया कि फंदा 5-6 दिन पहले लगा होगा लेकिन अगर ऐसा था तो वन विभाग की गश्त और निगरानी व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े होते हैं। इतने दिनों तक बाघ को नहीं बचाया जा सका जो वनकर्मियों की कार्यशैली पर सवालिया निशान लगाता है। नगर पालिका परिषद बालाघाट द्वारा धार्मिक एवं स्वयंसेवी संगठनों के सहयोग से संयुक्त रूप से स्वच्छता अभियान चलाया गया। जहां धार्मिक स्थल शंकरघाट में साफ.सफाई की गई वहीं रेंजर कॉलेज मैदान को भी कूड़ा.करकट हटाकर स्वच्छ किया गया। इस दौरान रोटरी क्लब ऑफ टाईगर के सदस्यों सहित अन्य गणमान्य जनों व नपा कर्मचारियों ने स्वच्छता को लेकर श्रमदान किया। बालाघाट। प्रदेश सरकार के मंत्री प्रहलाद पटेल द्वारा दिए गए बयान को लेकर कांग्रेस नेताओं ने नाराजगी जताई है। बुधवार को स्थानीय सर्किट हाउस में पत्रकार वार्ता के दौरान कांग्रेस जिला अध्यक्ष संजय उइके ने कहा कि मंत्री जनता का अपमान कर रहे हैं जिसे कांग्रेस बर्दाश्त नहीं करेगी।संजय उइके ने घोषणा की कि अगर मंत्री अपने बयान वापस नहीं लेते तो कांग्रेस 6 मार्च से विरोध प्रदर्शन करेगी। विरोध ब्लॉक जिला और प्रदेश स्तर पर किया जाएगा और 11 मार्च से संगठन सड़क पर उतरकर विरोध जताएगा।कांग्रेस नेताओं ने सरकार पर किसानों से धोखा करने और चुनावी वादे पूरे न करने का आरोप लगाया। बालाघाट विधायक अनुभा मुंजारे वारासिवनी विधायक विवेक पटेल और परसवाड़ा विधायक मधु भगत सहित अन्य कांग्रेस नेताओं ने भी मंत्री के बयान की आलोचना करते हुए कहा कि सरकार के मंत्रियों को सत्ता का अहंकार हो गया है।कांग्रेस ने सरकार को चेतावनी दी है कि यदि मंत्री ने माफी नहीं मांगी तो पार्टी राज्यभर में बड़ा आंदोलन करेगी। अब देखना यह होगा कि प्रदेश सरकार इस पर क्या प्रतिक्रिया देती है। लालबर्रा मुख्यालय से सटी ग्राम पंचायत अमोली के उपसरपंच सहित 18 पंचों ने सरपंच किशोर पडवार पर शासकीय राशि का दुरूपयोग करने सहित अन्य आरोप लगाते हुए सरपंच के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव लाने के लिए विगत दिवस अनुविभागीय अधिकारी (राजस्व) वारासिवनी को ज्ञापन सौंपा था। जिसके बाद 4 मार्च को अविश्वास प्रस्ताव पर चर्चा के लिए अनुविभागीय अधिकारी (राजस्व) वारासिवनी के निर्देश पर ग्राम पंचायत भवन अमोली में बैठक आयोजित की गई। यह चर्चा बैठक पीठासीन अधिकारी तहसीलदार कन्हैयालाल टेकाम सहायक पीठासीन अधिकारी खण्ड पंचायत अधिकारी खिलेन्द्र सोनवंशी की उपस्थिति में प्रारंभ हुई। जिसके बाद सरपंच के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव लाने के लिए मतदान की प्रक्रिया प्रारंभ की गई और उपसरपंच सहित 19 पंचों ने सरपंच के खिलाफ मतदान किया। वहीं सरपंच के खिलाफ लाये गये अविश्वास प्रस्ताव के पक्ष में उपसरपंच सहित 19 पंचों ने एक तरफा मतदान किया है एवं विरोध में एक मत नहीं पड़े है। बोध गया मंदिर अधिनियम 1949 में जो एक्ट बना था उसमें चार ब्राम्हणों को ट्रस्टी बनाया गया था। इस एक्ट में संशोधन करने की मांग को लेकर बौद्ध धर्म को ही बोध गया मंदिर को सौंपा जाए व इसे ब्राम्हण से मुक्त कराने की मांग को लेकर ग्रामीण बौद्ध संघ भरवेली द्वारा ५ मार्च को रैली निकालकर कलेक्ट्रेट कार्यालय पहुंचकर महामहिम राष्ट्रपति के नाम कलेक्टर को ज्ञापन सौंपा गया। ज्ञापन सौंपने पहुंचे संगठन के पदाधिकारियों ने बताया कि सभी धर्म स्थल में पूजा का अधिकार उनके धर्म या समाज को हैं। ऐसे में बौद्ध धर्म के स्थल में भी पूजन का अधिकार बौद्ध समाज को ही मिलना चाहिए। लेकिन पुराने १९४९ के एक्ट के तहत बौद्ध समुदाय के धार्मिक स्वतंत्रता का हनन किया जा रहा है जिसे अब बौद्ध समाज सहन नहीं करेगा। बौद्ध विहार को ब्राम्हणों से मुक्ति नहीं दिलाया गया तो पूरे देश में सडक़ पर उतरकर आंदोलन व प्रदर्शन किया जाएंगा। वारासिवनी जनपद पंचायत अंतर्गत ग्राम पंचायत कायदी के ग्रामीणों ने बुधवार को कलेक्ट्रेट कार्यालय पहुंचकर रोजगार गारंटी के कार्य में बाधा पहुंचाने पर ग्राम पंचायत कायदी के उप सरपंच धरमसिंह राजपूत व अन्य पंचों के खिलाफ उचित कार्यवाही किये जाने की मांग को लेकर कलेक्टर को ज्ञापन सौंपा है। इस दौरान शिकायत करने पहुंचे ग्रामीणों ने बताया कि ग्राम पंचायत द्वारा शासन की योजना के तहत हमें १०० दिन काम दिया जाए। पंचायत में निर्माण कार्य के दौरान सरपंच व उप सरपंच के बीच राजनीतिक द्वेष होने के चलते उप सरपंच द्वारा शिकायत कर कार्य बंद करा दिया जाता है। जिससे हमें रोजगार नहीं मिल पा रहा है। उप सरपंच द्वारा कुछ पंचों को साथ लेकर सरपंच के खिलाफ आये दिन शिकायत की जाती है व अनशन एवं धरना किया जाता है। इस मामले की उचित जांच कर निष्पक्ष कार्यवाही किया जाए।