1984 की भोपाल गैस त्रासदी दुनिया की सबसे भयावह औद्योगिक आपदाओं में से एक है। इस त्रासदी के बाद यूनियन कार्बाइड फैक्ट्री के परिसर में जमा हुआ 337 मीट्रिक टन जहरीला कचरा 40 साल तक वहीं पड़ा रहा। इसने आसपास की 42 बस्तियों के भूजल को प्रदूषित कर दिया। कई सालों से स्थानीय निवासियों को इसके खतरों का सामना करना पड़ा। 10 साल लंबी कानूनी लड़ाई के बाद हाईकोर्ट ने 6 जनवरी 2025 तक इस कचरे को हटाने का आदेश दिया। और यह ऐतिहासिक काम 3 जनवरी को पूरा कर लिया गया। इस जहरीले कचरे ने 42 बस्तियों के भूजल को प्रदूषित कर दिया था जिससे स्थानीय लोगों को कई स्वास्थ्य समस्याओं का सामना करना पड़ा। पानी पीने योग्य नहीं रहा और जमीन की उर्वरता भी प्रभावित हुई। अब कचरे के हटने से इन इलाकों में राहत की उम्मीद की जा रही है।