लालबर्रा क्षेत्र के ग्राम पंचायत बेहरई में अचानक एक भालू के घुसने से हड़कंप मच गया। भालू दुर्गाप्रसाद बघेले के घर के कोठे में घुस गया जिससे ग्रामीणों ने वन विभाग और पुलिस को सूचना दी। वन विभाग की टीम ने 5-6 घंटे की मेहनत के बाद भालू को बेहोश कर सुरक्षित पकड़ा। भालू ने किसी को नुकसान नहीं पहुंचाया और उसे बाद में सुरक्षित जंगल में छोड़ दिया गया। भालू के गांव में घुसने से जो दहशत का माहौल था वह उसे पकड़े जाने के बाद कम हो गया है। बालाघाट जिले के ग्रामीणों ने सरपंच और सचिव पर अनियमितताओं का आरोप लगाते हुए कलेक्टर को ज्ञापन सौंपा। ग्रामीणों का कहना है कि शिकायत के तीन माह बाद की गई जांच में जांच टीम के अधिकारियों ने कुछ बिंदुओं पर तो जांच सही की है लेकिन कुछ बिंदुओं की जांच में सांठ-गांठ कर गोलमाल कर दिया है। अभी तक सरपंच और सचिव पर कोई कार्रवाई नहीं की गई है। ग्रामीणों ने कलेक्टर से मांग की है कि सरपंच के खिलाफ कार्रवाई की जाए और शासकीय राशि की रिकवरी की जाए नहीं तो वे आंदोलन करने को मजबूर होंगे। शहर के मुख्यालय स्थित तहसील कार्यालय में पानी निकासी की व्यवस्था न होने के कारण बारिश में कार्यालय परिसर में घुटने तक पानी भर जाता है। बुधवार को दोपहर करीब 12 बजे हुई बारिश से कर्मचारियों और अन्य लोगों को काफी परेशानी का सामना करना पड़ा। तहसीलदार श्री अहिरवार ने बताया कि पानी निकासी के लिए पाइप चोक हो गया है जिसकी शिकायत नगर पालिका को की गई है। जल्द ही इसे ठीक करने का प्रयास किया जाएगा ताकि भविष्य में ऐसी समस्याएं न हों। मध्यप्रदेश पुलिस पेंशनर संघ की जिला इकाई बालाघाट की बैठक बुधवार को मोतीगार्डन में हुई। बैठक में सेवानिवृत्त पुलिस कर्मचारियों को जीआईएस बीमा न मिलने और 4 प्रतिशत महंगाई भत्ता न मिलने पर चर्चा की गई। संगठन के अध्यक्ष उमेशचन्द्र प्रजापति ने बताया कि 60-70 कर्मचारियों को बीमा नहीं मिला है। पुलिस अधीक्षक को ज्ञापन देकर चक्रवृद्धि ब्याज सहित बीमा की मांग की जाएगी। बैठक में अन्य पदाधिकारी और सदस्य भी मौजूद रहे। बुधवार को परसवाड़ा के स्थानीय बाजार से मछली की विभिन्न प्रजातियों को जब्त किया गया। यह कार्रवाई एसडीएम सिंहसार और मत्स्य विभाग की टीम द्वारा की गई। मत्स्य अधिकारी श्रीमती पूजा रोडगे ने बताया कि बाजार से 20 किलो मेजर कार्प और 30 किलो लोकल माइनर मछली जब्त की गई। जब्त की गई मछलियों की नीलामी की गई जिससे 3050 रुपये शासन कोष में जमा होंगे। इसके अलावा 70 किलो थाईलैंड की मांगुर प्रजाति को जहरीला बताते हुए गड्ढा खोदकर नष्ट किया गया।