महाराष्ट्र की राजनीति में भारी तूफान के आसार नजर आने लगे हैं. मराठा आरक्षण को लेकर जो प्रतिक्रिया महाराष्ट्र सरकार मे हो रही है. उसमें पिछड़ा वर्ग समुदाय ने आग में घी डालने का काम कर दिया है. ओबीसी के नेताओं ने छगन भुजबल को ओबीसी वर्ग की उपेक्षा करने का आरोप लगाया. ओबीसी नेतृत्व के दबाव में छगन भुजबल ओबीसी समुदाय के पक्ष में खड़े हो गए. उन्होंने ओबीसी के पक्ष में बयान दिया. इसी बीच महाराष्ट्र के आबकारी मंत्री शंभू राज देसाई ने छगन भुजबल को इस मामले में राजनीति करने का आरोप लगाते हुए दोनों समुदायों के बीच में फूट डालने की बात कहते हुए इस्तीफा देने की बात कह दी. इसके बाद शिवसेना कोटे से बने मंत्री और विधायकों में ही मराठा और ओबीसी आरक्षण को लेकर विवाद बढ़ गया है. ओबीसी समुदाय ने दिवाली के बाद जालना से आरक्षण को लेकर आंदोलन की चेतावनी दी है.यहीं से मराठा आरक्षण आंदोलन शुरू हुआ था. यहां पर दंगा भी भड़का था. अब वहीं से पिछड़े वर्ग का आंदोलन शुरू होगातो महाराष्ट्र में इसका बहुत बड़ा असर होगा. मराठा समुदाय के आंदोलन में मराठा विधायकों के घर जला दिए गए थे. पिछड़े वर्ग समुदाय का कहना है कि उसके कोटे से मराठा आरक्षण का कोटा नहीं दिया जाएगा. यदि ऐसा हुआ तो हुआ है अपने आंदोलन को तेज करेंगे. ओबीसी समुदाय भी उग्र आंदोलन पर उतारू हो गया है. पिछड़े वर्ग समुदाय के आंदोलनकारी ने अपने मंत्रियों और विधायकों को इस आशय की चेतावनी दे दी है. सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर महाराष्ट्र के विधानसभा अध्यक्ष को भी शिवसेना के विधायकों के दल बदल मामले में फैसला लेना है. इसी बीच महाराष्ट्र सरकार में मंत्रियों के बीच मे ही आपस में तनातनी शुरू हो गई है.मराठा और पिछड़ा वर्ग आंदोलन को लेकर महाराष्ट्र में दोनों तरफ से तलवारें निकाल ली गई हैं.जिसके कारण यह कहा जा रहा है कि अब कुछ ही दिनों की मेहमान महाराष्ट्र सरकार रह गई है.