नगर निगम भोपाल भ्रष्टाचार का अड्डा बना हुआ है । यहां छोटे से छोटे काम के लिए हर व्यक्ति द्वारा रिश्वत मांगी जाती है .. यहां के कर्मचारी और अधिकारी अपने आप को नगर निगम कमिश्नर से ऊपर समझते हैं । इतना ही नहीं. कई अधिकारी तो मुख्यमंत्री के आदेश तक को हवा हवाई कर देते हैं । और वह बिना रिश्वत लिए कोई काम तक नहीं करते । इतना ही नहीं वार्ड स्तर के कर्मचारी तक फाइलों को महीनों तक दबाए बैठे रहते हैं । ऐसा ही एक मामलाअशोका गार्डन स्थित इकबाल नगर के कृष्ण चंद्र भार्गव का है । जो पिछले 6 महीने से अपनी पत्नी के देहांत के बाद उनके मकान के नामांतरण के लिए दर-दर की ठोकरें खा रहे हैं । उन्होंने परेशान होकर कलेक्टर भोपाल से गुहार भी लगाई .. लेकिन भ्रष्टाचारी अधिकारी कर्मचारी जिला कलेक्टर के आदेश तक को मानने तैयार नहीं है . उल्टा पीड़ित कृष्ण चंद्र भार्गव को ज्यादा परेशान करने लगे । आपको बता दें कि कृष्ण चंद्र भार्गव की उम्र 83 वर्ष है । और वह पुलिस विभाग से रिटायर्ड है । आइए आपको सुनाते हैं कृष्णचंद्र भार्गव की कहानी उन्हीं की जुबानी ।