37 हजार वर्ग फीट की विवादित जमीन पर कब्जा दिलाने राजधानी के तीन थाना क्षेत्रों में लगाया गया कफ्र्यूू देर रात हटा लिया गया। पुराने भोपाल के हनुमानगंज, टीला जमालपुरा और गौतम नगर के करीब 4 लाख रहवासियों और ट्रेन-बस से भोपाल आने वाले सैकड़ों यात्री अजीब परिस्थिति में फंसे रहे। दरअसल, हाईकोर्ट के अप्रैल 2019 के एक आदेश का पालन कराने के लिए जिला प्रशासन ने रविवार सुबह तीन थाना क्षेत्रों में कफ्र्यू् और 11 क्षेत्रों में धारा 144 लगा दी। हाईकोर्ट ने राजदेव कॉलोनी की 37268 वर्ग फीट की जमीन पर राजदेव जनसेवा न्यास को कब्जा दिलाने के आदेश दिए थे। बोन कैंसर से पीडि़त 12 साल के बच्चे का पैर बचाने जवाहर लाल नेहरू कैंसर अस्पताल में बेहद जटिल सर्जरी की गई। इस सर्जरी के दौरान 13 सेंटीमीटर की हड्डी को पैर से अलग करके रेडियोथैरेपी दी गई। इसके बाद हड्डी को वापस पैर में जोड़ा गया। यह इस तरह की शहर की पहली सर्जरी थी। डॉ. रश्मि अरोरा ने बताया कि अगस्त से कीमोथैरेपी देकर कैंसर को कम किया जा रहा था। सुबह 10.30 बजे पहला ऑपरेशन कर हड्डी निकाली गई। 30 मिनट की रेडिएशन थैरेपी के बाद हड्डी को दूसरा ऑपरेशन कर जोड़ा गया। इस प्रक्रिया में साढ़े चार घंटे लगे। अब कैंसर पूरी तरह खत्म हो चुका है। हड्डी को जुडने में 6 से 8 सप्ताह लग सकते हैं। मुरैना के छैरा-मानपुर के बाद अब दिमनी में शराब से दो लोगों की मौत का मामला सामने आया है। जबकि दो लोग गंभीर हैं। इनमें से एक धर्मेंद्र जाटव ने पुलिस को बताया कि उन्होंने छिछावली गांव के माताप्रसाद और बलवीर के साथ बड़ोखर के सरकारी ठेके से मसाले वाली लाल शराब खरीदी थी। तीनों जब घर पहुंचे तो उन्हें उल्टियां होने लगीं। आंखों की रोशनी कम हो गई। परिजन इन्हें जिला अस्पताल ले गए, जहां डॉक्टरों ने माताप्रसाद को मृत घोषित कर दिया। जबकि बलवीर और धर्मेंद्र की हालत गंभीर होने पर उन्हें ग्वालियर रेफर कर दिया। इससे पहले शनिवार को ही सत्यनायण की भी जिला अस्पताल में मौत हुई थी। बर्ड फ्लू के खौफ के चलते इन दिनों मुर्गा खाने के शौकीनों ने भी उससे दूरी बना ली है। पोल्ट्री में भी बर्ड फ्लू की पुष्टि होने के बाद इसकी मांग में और कमी आ गई है। इधर, मुर्गे की डिमांड कम होने से बकरे की शामत आ गई है। इसकी मांग दोगुना तक बढ़ गई है। भले ही मुर्गे की तुलना में बकरा काफी महंगा है बावजूद इसके लोग कम मात्रा में ही सही पर इसे खरीद रहे हैं। राजधानी में आम दिनों में मुर्गे की खपत करीब 25 टन के आसपास हो जाती थी। अब स्थित यह है कि मुर्गा मुश्किल से 10-12 टन ही बिक रहा है। जानकारों का कहना है कि भले ही 70 डिग्री सेल्सियस पर पका चिकन पूरी तरह सेफ है बावजूद इसके लोग इसका सेवन करने से डर रहे हैं।