सुप्रीम कोर्ट ने एक अहम फैसले में कहा है कि जीएसटी और कस्टम्स अधिनियम के मामलों में अब अग्रिम जमानत का प्रावधान लागू होगा। चीफ जस्टिस संजीव खन्ना की अध्यक्षता वाली बेंच ने स्पष्ट किया कि यदि किसी व्यक्ति के खिलाफ एफआईआर दर्ज नहीं हुई है तो भी वह अग्रिम जमानत के लिए अदालत का रुख कर सकता है। कोर्ट ने कहा कि कस्टम्स अधिकारियों को पुलिस अधिकारी नहीं माना जा सकता और सिर्फ संदेह के आधार पर गिरफ्तारी नहीं की जा सकती है। अधिकारियों को पहले पुख्ता साक्ष्य जुटाने होंगे जिन्हें मजिस्ट्रेट द्वारा सत्यापित किया जा सके। अदालत ने जबरन कर वसूली के मामलों पर भी चिंता जताई और कहा कि यदि कोई व्यक्ति दबाव में कर चुकाता है तो वह न्याय के लिए रिट याचिका दायर कर सकता है। इस फैसले से व्यापारियों और करदाताओं को बड़ी राहत मिलेगी क्योंकि अब वे एफआईआर दर्ज होने से पहले भी गिरफ्तारी से बचाव के लिए अग्रिम जमानत ले सकेंगे।