देवरी ब्लाक के ग्राम महाराजपुर में 1008 श्री नेमिनाथ दिगम्बर जैन पंचायती बड़ा मंदिर 1008 श्री पाश्र्वनाथ दिगम्बर जैन छोटा मंदिर (सोधिया मोहल्ला) में दशलक्षण महापर्व के आठवें दिन त्याग धर्म पर सुबह से अभिषेक शांतिधारा हुई। जिसमें शाम को कवि सम्मेलन का आयोजन किया गया।इस दौरान विद्वान शुभम भैया ने बताया कि दशलक्षण धर्म में उत्तम त्याग धर्म को आमतौर पर दान करने को ही त्याग कहा व समझा जाता है। लेकिन त्याग और दान में महान् अन्तर है दान किया जाता है। किसी उद्देश्य के लिए परोपकार के लिए जबकि त्याग किया जाता है संयम के लिए दान करने से पुण्य बन्ध होता है त्याग करना धर्म है। धन का लोभ नहीं छूटता वह एक लाख दान में देता है तो दो लाख कमाने को आतुर रहता है लेकिन त्यागी जो त्याग देता है फिर उसके चक्कर में नहीं रहता। त्याग होता है कषायों का मोह-राग-द्वेष का अहंकार का त्याग करने से आत्मा को बल मिलता है। मोक्ष मार्ग की वृद्धि होती है।