व्यक्तित्व

नहीं रहे 'कड़वे प्रवचन' देने वाले तरुण सागर

Posted by Divyansh Joshi on



क्रांतिकारी राष्ट्रसंत परम पूज्य मुनि श्री 108 तरुण सागर जी महाराज का शनिवार सुबह 3.18 बजे समाधि मरण हो गया है । जैन समाज ने कम उम्र में एक ओजस्वी वक्ता और सामाजिक एकता के प्रतीक को खो दिया। अंतिम संस्कार दोपहर 3 बजे तरुणसागरम तीर्थ दिल्ली मेरठ हाइवे पर होगा। मुनि तरुण सागर का जन्म साल 1967 में मध्यप्रदेश में हुआ था और उनका जन्म का नाम पवन कुमार जैन था. 20 साल की उम्र में तरुण सागर जैन मुनि बन गए थे.तरुण सागर को उनके कड़वे प्रवचनों के लिए जाना जाता था. वे अपने अनुयायियों को जो प्रवचन देते थे उन्हें कड़वे प्रवचन कहते थे.न प्रवचनों में तरुण सागर समाज में मौजूद कई बुराइयों की तीखे शब्दों में आलोचना करते थे. उनके प्रवचनों की किताब भी 'कड़वे प्रवचन' नाम से प्रकाशित की जाती है.जैन मुनि बिना वस्त्रों के घूमा करते थे। वह सांसारिकता के बीच रहकर भी लोगों को अध्यात्म के दर्शन कराते थे। रोजमर्रा के जीवन में आने वाले घुमावदार पड़ावों और उनकी चुनौतियों से जूझने के बेहद आसान तरीके जो उनके पास था उन्हें लोगों को मुहैया करवाता थे। उनके शब्दों और वाणी में एक आग थी। इस आग की वैचारिक अभिव्यक्ति का दायरा उन्हें जैन समाज के दायरे से बाहर निकालकर उनकी दुनिया को व्यापक बना देता था।