प्राइम टाइम

प्राइम टाइम - लोकतंत्र का चौथा स्तंभ खतरे में

Posted by Divyansh Joshi on



दुनिया के सबसे बड़े लोकतंत्र में चौथा स्तंभ माने जाने वाले मीडिया के स्तंभ लड़खड़ाता जा रहा है ।पत्रकारों को ईमानदारी से पत्रकारिता करने के लिए नौकरी से हाथ धोना पड़ रहा है । पत्रकारों को अपना बुनियादी काम यानि की सरकार से सवाल पूछने के लिए अपना करियर दाव पर लगाना पड़ रहा है । देश के एक बड़े टीवी न्यूज चौनल के दो बड़े एंकर और एक एडिटर को सरकार के खिलाफ आवाज उढाने के कारण अपनी नौकरी से हाथ धोना पड़ा । यह तो बड़े मीडिया संस्थान है लेकिन क्षैत्रीय लेवल पर कई ऐसे पत्रकार है जिन्हे अपना करियर खत्म करके दूसरे क्षैत्र में तक आना पड़ गया है । इसके कारण मीडिया की आजादी पर अंकुश लग रहा है मीडिया सरकार के दबाव में सच्चाई सामने नहीं ला पा रही है । वैसे तो पत्रकारों का काम होता है आम जनता के सवालों को उनके मुद्दे को उठाने का लेकिन अब आम जनता की आवाज बनने वाले पत्रकारों पर सरकार का दबाव बढ़ता जा रहा है गौर करने वाली बात यह है कि इस दबाव के कारण सबसे ज्यादा नुकसान आम जनता का होगा । इन सबके बीच सत्ता पक्ष का कहना है कि यह पत्रकारो का नौकरी छोड़ना उनका निजी मामला है किसी भी पत्रकार को सरकार नहीं दबा सकती वहीं विपक्ष ने कहा कि मीडिया आज बहुत बुरी स्थिती में आ गया है । आज जिस तरह की तानाशाही कर मीडिया के उपर सरकार दबाव बना रही है।
यह एक प्रकार से मीडिया के लिए आपातकाल जैसी स्थिती बन चुकी है लेकिन सोचने वाली बात यह है कि इससे लोकतंत्र को सबसे ज्यादा खतरा होने वाला है ।