प्राइम टाइम

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Posted by khalid on



मध्यप्रदेश सहित तीन राज्यों में इसी वर्ष विधानसभा चुनाव होने जा रहे हैं। मध्यप्रदेश और छत्तीसगढ़ में पिछली तीन बार से भाजपा का शासन रहा है। पिछले चुनावों की तुलना में इस बार चुनाव प्रचार में आक्रामकता कम दिखाई दे रही है। ऐसा इसलिए भी कि वर्ष 2014 के लोकसभा में सोशल मीडिया ने कई जन प्रतिनिधियों की असल छवि उजागर करने में अहम भूमिका निभाई है। वहीं, जनता के साथ हुई धोखेबाजी को भी सोशल मीडिया ने दुनिया के सामने वायरल किया है। एक तरह से सोशल मीडिया बीते चुनावों में हावी रहा। ऐसे में इस बार सोशल मीडिया चुनाव में अहम भूमिका या निर्णायक भूमिका में होगा। सोशल मीडिया की बात करें और प्रशांत किशोर उर्फ पीके का जिक्र न हो ऐसा हो नहीं सकता। ये वही प्रशांत किशोर है, जिन्होंने पहले नरेंद्र मोदी के प्रधानमंत्री बनने में महत्वपूर्ण रोल निभाया था। इसके बाद उन्होंने बिहार में जनता दल यूनाईटेड का दामन थामा और नितीश कुमार को मुख्यमंत्री बनने में अहम योगदान दिया। सोशल मीडिया में पीके की टीम को महारत हासिल है। उनकी टीम के कई खिलाड़ी उनका साथ भी छोड़ चुके हैं। उन्होंने खुद ही अपनी टीम भी तैयार कर ली है। तीन राज्यों में इसी साल विधानसभा और अगले साल लोकसभा चुनाव होने जा रहे हैं। ऐसे में सोशल मीडिया टीम की बखत भी बढ़ गई है। मध्यप्रदेश में भाजपा और कांग्रेस ने चुनावी बिगुल बजा दिया है। हालांकि, बीच में सोशल मीडिया पर कुछ समय वीडियो और कुछ खबरें वायरल होती रही। एक-दूसरे पर वीडियो के माध्यम से वार और पलटवार हो रहे हैं ।अब फिर एक बार सोशल मीडिया की चर्चा सियासी गलियारे में होने लगी है। जानकारी के अनुसार, मध्यप्रदेश, राजस्थान और छत्तीसगढ़ की दोनों ही बड़ी पार्टियां सोशल मीडिया की बेहतर कंपनियों और लोगों को जोडऩे में लगी हुई हैं। इसके लिए कुछ कंपनियां भी इन पार्टियों को अपनी सेवाएं देने के लिए संपर्क कर रही हैं। इसके अलावा व्यक्तिगत तौर पर कुछ सोशल मीडिया विशेषज्ञ स्वयं को 'पीके' की टीम का बताते हुए भी संपर्क कर रहे हैं। उनका दावा है कि उन्होंने पीके के साथ काम किया है और वे बाजी पलटने का माद्दा रखते हैं। हालांकि, इस मामले को लेकर कोई भी आधिकारिक बयान देने से बच रहा है। इससे स्पष्ट है कि तीनो राज्यों में विधानसभा चुनाव में इस बार सोशल मीडिया की भूमिका बड़ी होगी। उधर, भाजपा के साइबर योद्धा और कांग्रेस में राजीव के सिपाही भी सोशल मीडिया पर सक्रिय हैं। उनकी सक्रियता फेसबुक से लेकर ट्विटर तक दिखाई दे रही है। अभी तो यह प्रतीत होता है कि कांग्रेस ने सोशल मीडिया पर माहौल बना लिया है, क्योंकि केंद्र और मध्य प्रदेश सरकार की तमाम नीतियों का पोस्टमार्टम सोशल मीडिया पर आए दिन हो रहा है। इसमें कुछ जनता भी साथ दे रही है। भाजपा ने जिस सोशल मीडिया को बीते चुनाव में हथियार बनाया था अब उस हथियार के बूमरैंग होने का खतरा भी है, क्योंकि कांग्रेस ने भाजपा को उसी के हथियार से मात देने की रणनीति बनाई है। खासकर फेसबुक और ट्विटर पर सत्तासीन दल के नेताओं को छोटी-छोटी बातों पर ट्रोल किया जा रहा है।