प्राइम टाइम

प्राइम टाइम - मध्य प्रदेश में कांग्रेस को संजीवनी जरुरत

Posted by Divyansh Joshi on



मध्य प्रदेश में कांग्रेस इस बार अपने लिए संजीवनी ढूंढ रही है. पिछले 15 साल से सुस्त पड़े अपने संगठन, ढह चुकी माली हालत और सत्ता में वापसी के लिए उसे संजीवनी की जरुरत है । अगर कांग्रेस को संजीवनी नहीं मिली तो आने वाले कई सालों तक इस झटके से उसका उबरना मुश्किल हो सकता है. प्रदेश कांग्रेस को फिलहाल सामान्य से ज्यादा मेहनत करने की जरूरत है. अलबत्ता हो ये रहा है कि पार्टी संगठन में ही अभी नेताओं की जमावट तक ठीक से नहीं हो पाई है. अभी पिछले पखवाड़े पार्टी नेतृत्व ने मानक अग्रवाल को हटाकर शोभा ओझा को पार्टी का मीडिया प्रभारी बनाया है.’अब प्रदेश में अपना अस्त्तिव बनाने के लिए कांग्रेस को अन्य संगढनो का सहारा लेना पड़ रहा है । जिसको लेकरं अब कांग्रेस अन्य दलों के साथ गठबंधन कर चुनाव में उतरने की तैयारी कर रही है. प्रदेश कांग्रेस के अध्यक्ष कमलनाथ ख़ुद इसके संकेत दे चुके हैं..वहीं समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव का मध्य प्रदेश दौरा करना और पूर्व प्रदेश अध्यक्ष अरुण यादव सहित प्रदेश कांग्रेस के कुछ नेताओं से मिलना भी यही साबित कर रहा है कि मध्य प्रदेश में कांग्रेस को जीत के करीब पहुचाने में दूसरे दल का सहारा लेना ही सही साबित होगा ।अब बात करें अगर गठबंधन हुआ तो कितना फर्क पड़ेगा. कांग्रेस अगर बहुजन समाज पार्टी , समाजवादी पार्टी और गोंडवाना गणतंत्र पार्टी से ही गठजोड़ कर लेती है तो वह लगभग 90 से 100 सीटों पर भाजपा के लिए परेशानी खड़ी कर देगी.बीते कई सालों से बसपा खुद अपने दम पर ही छह से नौ फीसदी तक वोट हासिल करती आ रही है. यह जनाधार ही कांग्रेस के लिए निर्णायक तौर पर मददगार हो सकता है. फिर अगर इसमें सपा और जीजीपी भी जुड़ गई तो ये पार्टियां भी क्रमशरू पिछड़ी और अनुसूचित जनजाति के लिए आरक्षित सीटों पर कांग्रेस को फायदा पहुंचाएंगी ...हालांकि अभी तक को गठबंधन को लेकर कोई आधिकारिक बयान सामने तो नहीं आया है लेकिन आने वाले कुछ समय में सारी स्थितियां साफ हो जाएंगी देखना होगा कि गठबंधन की गांठ में कांग्रेस बाकी दलों के साथ कैसे सांमजस्य बनाती है।