प्राइम टाइम

प्राइम टाइम-जन आशीर्वाद यात्रा के दौरान मिले फीडवैक के आधार पर ही टिकटों का वितरण होगा

Posted by khalid on



मध्यप्रदेश में सत्ता की लगातार चौथी पारी खेलने के लिए सियासी नेट प्रेक्टिस के तहत मुख्यमंत्री शिवराज सिंह की जन आशीर्वाद यात्रा के दौरान मिले फीडवैक के आधार पर ही टिकटों का वितरण होगा। इस बार यहां भाजपा में टिकट के मोर्चे पर सर्जिकल स्ट्राइक के जबर्दस्त आसार हैं। माना जा रहा है कि कांग्रेस की चुनौती से मुख्यमंत्री शिवराज ही उबार सकते हैं, इसलिए संगठन ने उन्हें मैदानी हालात के आधार पर चुनावी रणबांकुरे को चिन्हित करने की जिम्मेदारी दी है। गौरतलब है कि 13 सालों के भाजपा राज में मुख्यमंत्री शिवराज सिंह ने अपनी सक्रियता तथा जनता में उदार छबि के बूते खास पहचान बनाई है। इसलिए सत्ता विरोधी माहौल नहीं बना है। सरकार और मुख्यमंत्री के प्रति जनता में नाराजगी का भाव नजर नहीं आती है। लेकिन भाजपाई जन प्रतिनिधियों के प्रति क्षेत्रीय असंतोष तथा कार्यकर्ताओं की नाराजगी की शिकायतें पार्टी संगठन को लगातार मिल रही हैं। यही वजह है कि पार्टी ने अपने विधायकों को हर तरह से आगाह कर दिया है कि जो जनता और कार्यकर्ताओं की उम्मीदों पर खरे उतरते नहीं पाये जायेंगे, वे पार्टी से टिकट की कोई उम्मीद न रखें।
भाजपा का केंद्रीय नेतृत्व हर हाल में मध्यप्रदेश में लगातार चौथी बार भाजपा की सरकार बनाना चाहता है। राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी कोई जोखिम नहीं लेना चाहते इसलिए मौजूदा विधायकों के क्रियाकलापों पर कई स्तर पर जानकारी एकत्र की जा रही है। बैठकों के जरिये यह संदेश दिया जा चुका है कि जो जनता और कार्यकर्ताओं के बीच अपने काम और व्यवहार से योग्य पाया जायेगा, उसे ही मैदान में उतारा जायेगा। सभी 230 सीटों के लिए भाजपा ने प्रत्याशी चयन के लिए बारीक छन्नी लगा रखी है। इस बार केवल बेहतर प्रदर्शन और जीत की प्रबल सम्भावना ही टिकट वितरण का आधार होगा। भाजपा में भी टिकट के दावेदारों की संख्या काफी हद तक बढ़ गई है।
भाजपा के भरोसेमंद सूत्रों के मुताबिक पार्टी कोई बड़ा नाम अथवा चेहरा देखकर नहीं, बल्कि सक्रियता, छबि और जीत की व्यापक सम्भावना के आधार पर ही टिकट देगी। जिससे मौजूदा कई सारे विधायकों के सिर पर ‘टिकट कट’ की तलवार लटक चुकी है। पार्टी ने समय रहते स्पष्ट कर दिया था कि जिसका काम अच्छा होगा, पार्टी उसी पर दांव लगायेगी।
ऐसी स्थिति में यह साफ दिखाई पड़ रहा है कि मुख्यमंत्री शिवराज सिंह की पहली प्राथमिकता यही होगी कि संगठित नजर आ रही कांग्रेस की चुनौती से पार पाने के लिए आंतरिक कसावट पर जोर दिया जाये। रही बात बड़े वोट समूहों का विश्वास बनाये रखने की तो शिवराज सरकार काफी जतन कर चुकी है। बाकी कसर दो माह में पूरी करने की तैयारी है। कुल मिलाकर अब सारा दारोमदार मुख्यमंत्री शिवराज पर है। भाजपा यह मान रही है कि केवल शिवराज का काम और नाम ही पार्टी को फिर से राज दिला सकता है।