प्राइम टाइम

प्राईम टाईम- मंदसौर गोलीकांड की रिपोर्ट पर उठते सवालों पर चर्चा.

Posted by Karan Pawar on



मंदसौर गोलीकांड में 5 किसानों को गोली मारने वाले पुलिस और सीआरपीएफ के जवानों को जस्टिस जेके जैन आयोग ने कुछ दिन पहले आई रिपोर्ट ने क्लीचचिट दे दी है. 9 महीने देरी से आई इस रिपोर्ट में कहा गया है कि तत्कालीन परिस्थितियों में भीड़ को तितर-बितर करने और पुलिस बल की जीवन रक्षा के लिए गोली चलाना ’नितांत आवश्यक’ और ’न्यायसंगत’ था. आयोग ने गोलीकांड में निलंबित हुए कलेक्टर स्वतंत्र कुमार और एसपी ओपी त्रिपाठी को भी सीधे तौर पर दोषी नहीं ठहराया है. केवल इतना भर लिखा है कि पुलिस और जिला प्रशासन का सूचना तंत्र कमजोर और आपसी सामंजस्य भी नहीं होने के कारण आंदोलन उग्र हुआ. आयोग का कहना है कि किसान और अफसरों के बीच संवादहीनता के कारण जिला प्रशासन को उनकी मांगों और समस्याओं की जानकारी नहीं थी और उन्हें जानने का प्रयास भी नहीं किया गया.सामान्य प्रशासन विभाग के अपर मुख्य सचिव प्रभांशु कमल ने इस रिपोर्ट पर कार्रवाई के लिए गृह विभाग के प्रमुख सचिव मलय श्रीवास्तव को 3 दिन पहले ही यह रिपोर्ट दी है. जांच आयोग के सूत्रों के अनुसार 13 पेज में 54 बिन्दुओं में रिपोर्ट का सारांश दिया गया है.

आयोग की जांच के मुख्य बिन्दु
1 सीआरपीएफ की गोलियों से 2 किसानों की मौत और 3 घायल।
2 पुलिस की गोलियों से 3 किसानों की मौत और 3 घायल.
3 सीआरपीएफ और पुलिस का गोली चलाना न तो अन्याय पूर्ण है न ही बदले की भावना से उठाया गया कदम.
4 मजिस्ट्रेट की अनुमति लेने के बाद ही थाना पिपल्याहाना थाना प्रभारी ने पहले लाठी चार्ज बाद में गोली चलाने के आदेश दिए.
5 वहीं पार्श्वनाथ फाटे पर कोई भी किसान नेता मौजूद नहीं था, ऐसी स्थिति में पूरा आंदोलन असामाजिक तत्वों के नियंत्रण में आ गया था.

इस रिपोर्ट को लेकर कांग्रेस सांसद और चुनाव प्रचार कमेटी का चेयरमैन ज्योतिरादित्य सिंधिया ने सवाल उठाए है। उन्होंने ट्वीटर के माध्यम से सरकार पर सवाल खड़े किए है। उन्होंने कहा कि इस रिपोर्ट के माध्यम से अन्नदाताओं और उनके परिजनों को न्याय दिलाना तो दूर इस दर्दनाक गोलीकांड को न्यायसंगत बताया जा रहा है। दरअसल, सिंधिया ने ट्वीट कर लिखा है कि मध्यप्रदेश में शिवराज सरकार के राज में मंदसौर में गत वर्ष 6 किसानों की दिन-दहाड़े गोली मारकर हत्या कर दी गयी थी, लेकिन अन्नदाताओं व उनके परिजनों को न्याय दिलाना तो दूर - इस दर्दनाक गोलीकांड को न्यायसंगत बताया जा रहा है । कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष कमलनाथ ने जे.के.जैन आयोग की रिपोर्ट पर कड़ी प्रतिक्रिया दी हैद्य कमलनाथ ने रिपोर्ट पर सवाल उठाते हुए कहा कि प्रदेश के किसान पुत्र मुखिया ने इस गोलीकांड के बाद , शाही उपवास पर बैठकर पीड़ित किसानो के परिजनो से जो वादे किये थे , वो सब झूठे साबित हुएद्य शिवराज ने झूठे घड़ियाली आँसू बहाये थे , उसका सच सामने आ गयाद्य

न्याय नहीं मिला तो हाईकोर्ट में चुनौती देंगे किसान आंदोलन के हाईकोर्ट में पिटीशनर पारस सकलेचा का आरोप है कि जैन आयोग ने तीन महीने की जांच पूरा करने के स्थान पर एक साल का समय जानबूझकर लगाया। हमारी मांग पर कई महत्वपूर्ण गवाहों को बयान के लिए नहीं बुलाया और दो बार आवेदन के बाद भी मेरे बयान नहीं लिए। इससे हमे जैन आयोग की मंशा पर शंका है। अगर आयोग की जांच में उचित न्याय नहीं मिला तो हम हाईकोर्ट में चुनौती देंगे।
हालांकि जैन आयोग की रिपोर्ट गृह विभाग के पास पहुंच गई है, और इसका परीक्षण किया जा रहा है लेकिन दूसरी ओर विपक्ष और किसान नेता इस रिपोर्ट पर सवाल उठा रहे हैं। और हाईकोर्ट में इस रिपोर्ट को चुनौती देने की बात कर रहे है। अब आने वाला वक्त ही बताएगा कि रिपोर्ट को लेकर और कितनी राजनीति होती है लेकिन सबसे बड़ा सवाल यह है कि इन सबके बीच जो किसान मरे उनके परिवारों की हालत आज भी जस की तस बनी हुई है , क्या इन सबसे बीच किसानों के परिवारों को न्याय मिल पाएगा ।