प्राइम टाइम

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Posted by khalid on



5 वर्षों में 1 वर्ष ऐसा आता है सरकार का रवैया उदारवादी हो जाता है उस 1 वर्ष में सरकार किसी संगठन तो क्या किसी व्यक्ति को भी नजर अंदाज नहीं करना चाहती और इसी कमजोरी का फायदा उठाकर कुछ संगठन अपनी अपनी मांगों को लेकर चुनावी वर्ष में सक्रिय हो जाते हैं और यही मांगे उस वक्त किसी आफत से कम नहीं होती जिस वक्त सरकार का खजाना खाली हो चुका हो और यह बात हड़ताल करने वाले भी जानते हैं की यदि इस वक्त मांगे नहीं मानी गई तो अगले 4 सालों तक सुनने वाला कोई नहीं है हाल यह है कि प्रदेश में इस समय जूनियर डॉक्टर कर्मचारी शिक्षक ट्रांसपोर्टर और मंत्री सभी हड़ताल पर हैं इन सब में जूनियर डॉक्टरों की हड़ताल की परिस्थितियां विषम होती जा रही है हमीदिया अस्पताल को देखें तो यहां मरीजों के बुरे हाल हैं जिनकी आर्थिक स्थिति खराब है वह भी हमीदिया से छुट्टी करवाकर प्राइवेट अस्पतालों में महंगा इलाज कराने को मजबूर हो रहे हैं इसी बीच भोपाल के जुनियर डॉक्टर तो काम पर वापस आ गए हैं लेकिन बाकी जगह पर हड़ताल खत्म होने के कोई आसार दिखाई नहीं दे रहे हैं क्योंकि ना तो जूनियर डॉक्टर झुकने को तैयार है और ना ही प्रशासन किसी तरह की छूट देने को सहमत है लिहाजा इसका खामियाजा मरीजों को भुगतना पड़ रहा है एसीएस जुलानिया का तो यहां तक कहना है कि अगर हड़ताल की वजह से किसी मरीज की जान जाती है तो जूनियर डॉक्टरों से 25 लाख रुपए की वसूली की जाएगी क्योंकि उनका पहला काम मरीजों को देखना है और मरीजों के स्वास्थ्य से खिलवाड़ बर्दाश्त नहीं किया जाएगा आंकड़ों की बात करें तो अब तक सरकार ने लगभग 20 डॉक्टरों के रजिस्ट्रेशन निरस्त कर दिए हैं यह भी कह सकते हैं कि सरकार द्वारा जूनियर डॉक्टरों की मांगों पर चर्चा करने की बजाय उन पर तानाशाही वाला रवैया अपनाया जा रहा है जिसके कारण फेडरेशन ऑफ प्रेसिडेंट्स डॉक्टर एसोसिएशन पूरे देश में राष्ट्रीय आंदोलन करने की चेतावनी दी है दिल्ली के संगठन ने तो घोषणा तक कर दी है कि वह मध्य प्रदेश जुड़ा के आंदोलन के साथ है इसी तरह कृषि मंडियों की बात करें तुम मंडी महासंघ ने मंडियों में अनिश्चितकालीन कारोबार बंद करने का ऐलान कर दिया है और इस घोषणा से प्रदेश की मंडियों में खरीद-फरोख्त बंद हो गई है और नहीं नहीं ट्रांसपोर्टरों की हड़ताल ने भी सरकार की मुश्किलें बढ़ा दी हैं ट्रकों के पहिए जाम होने से महंगाई के और बढ़ने के आसार दिखने लगे हैं क्योंकि ना तो बाजार में माल आ पा रहा है और ना ही बाजार से माल कहीं जा पा रहा है और इसी तरह एक बार फिर शिक्षक वर्ग की महिला शिक्षकों के सिर मुंडवाने से सरकार की छवि बिगड़ रही है कुल मिलाकर अगर देखा जाए मध्य प्रदेश में इस समय विभिन्न संगठनों के बीच एक होड़ सी मच गई है कौन कितना सरकार को झुका सकता है और जैसे तैसे सरकार किसी एक हड़ताल को खत्म कराती है तो 4 नए संगठन हड़ताल पर उतर आते हैं सरकार पर हड़तालों का ग्रहण लग गया है जिससे सरकार उबर नहीं पा रही है