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रूठे ब्राह्मणों को मनाने शंकर दयाल की जन्मशताब्दी मनाएंगे शिवराज

Posted by Divyansh Joshi on



शिवराज सिंह के खिलाफ लामबंद ब्राह्मण समाज को साधने के लिए सीएम शिवराज सिंह ने एक और युक्ति खोज निकाली है। भाजपा सरकार अपनी संस्थापक सदस्य राजमाता विजयाराजे सिंधिया के जन्मशताब्दी वर्ष को प्रेरणा पर्व के तौर पर मनाने जा रही है। अब इसमें पूर्व राष्ट्रपति डॉ शंकर दयाल शर्मा का नाम भी शामिल कर लिया गया है। रविवार को डॉ. शंकर दयाल शर्मा की जयंती के मौके पर शिवराज सिंह चौहान ने पूर्व राष्ट्रपति डॉ. शंकर दयाल शर्मा और राजमाता विजयाराजे सिंधिया के जन्म शताब्दी वर्ष को प्रेरणा पर्व के तौर पर मनाने की घोषणा की है। शिवराज सरकार ने एक राज्य स्तरीय समिति का गठन किया है। समिति साल भर होने वाले आयोजन का खाका तैयार करेगी। इस बात का ऐलान मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने पूर्व राष्ट्रपति डॉ शंकर दयाल शर्मा की जयंती के मौके पर किया। उन्होंने बताया कि साल भर डॉ शंकर दयाल शर्मा को याद किया जाएगा। विभिन्न कार्यक्रमों का आयोजन किया जाएगा । आपको बता दें कि इन दिनों मध्यप्रदेश में ब्राह्मण समाज जाति आधारित आरक्षण के खिलाफ आर्थिक आधार पर आरक्षण की मांग को लेकर लामबंद है। उपचुनावों में ब्राह्मण समाज ने अपनी ताकत भी दिखाई दी है। शिवराज सिंह को समझ आ गया था कि अब शहरी इलाकों से चुनाव जीतना आसान नहीं होगा इसलिए उन्होंने किसान पर फोकस किया। 2 बार किसान को सपने दिखाकर वोट ले चुके थे। इस बार किसान भी नाराज हो गया। शायद इसीलिए शिवराज सिंह ने अपनी राजनीति में श्दलित ऐजेंडाश् लागू किया। दलितों को खुश करने के लिए शिवराज सिंह ने ना केवल श्माई का लालश् बयान दिया बल्कि कई ऐसे फैसले किए जो ब्राह्मणों को अपमानित करने वाले या ब्राह्मणों को चिढ़ाने वाले थे। इससे पहले तक ब्राह्मण कभी एकजुट नहीं थे। इस बार ब्राह्मणों ने इस एक विषय पर एकजुटता प्रदर्शित कर दी। इधर दलितों ने भी श्हमारा शिवराजश् का नारा नहीं लगाया। अब शिवराज फिर से ब्राह्मणों को साधने की कोशिश कर रहे हैं। वहीं भोपाल की माटी से भारत के सर्वाच्च पद तक पहुंचे कांग्रेस मूल के पूर्व राष्ट्रपति डॉ शंकर दयाल शर्मा को तो कांग्रेस ने भी कभी याद नहीं किया। उनके साथ वोटबैंक नहीं है, इसलिए उन्हे बड़ी ही आसानी से भुला दिया गया। पूर्व राष्ट्रपति डॉ शंकर दयाल शर्मा की जयंती एवं पुण्यतिथि के अवसर पर मीडिया अक्सर कांग्रेस पर उंगलियां उठा लेती थी। अब वो परंपरा भी बंद हो गई।