राष्ट्रीय

EMS समूह की और से विनम्र श्रद्धांजलि

Posted by Divyansh Joshi on



इन कविताओं की लाईन पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी बाजपेयी की जिंदगी को बयां करती है । उन्होने कभी किसी से हार नहीं मानी । राजनीति में अगर जीत हुई तो उसे सबके साथ खुशी से मनाया और अगर हार हुई तो भी सभी के साथ खुशी से स्वीकार किया । उनका नाम अटल उनका उनके अटल निश्चित सोच और अटल इरादों को बयां करता है । अटल बिहारी बाजपेयी एक ऐसी शख्यित है जिनकी विरोधी दल भी तारीफ करते थे । उनके बेबाक अंदाज के आगे विरोधी भी नहीं टिक पाते थे। अटल बिहारी का मध्यप्रदेश से गहरा नाता है मध्यप्रदेश उनकी जन्म भूमि है ग्वालियर में उनका जन्म हुआ । बचपन से अटल अपने अटल इरादों से आगे बढ़ते रहे । पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी बाजपेयी को भारत के सबसे बड़े पुरस्कार भारत रत्न से भी 2015 मे नवाजा जा चुका है । राजनीति में अटल बिहारी वाजपयी की पहली बार आना 1942 में हुआ जब उन्हे और उनके भाई को भारत छोड़ो आन्दोलन के तहत 23 दिनों के लिए गिरफ्तार कर लिया गया था |23 दिन तक अटल बिहारी जेल में रहे थे । 1951 में दीन दयाल उपाध्याय के साथ मिलकर RSS ने हिन्दू राजनीतिक पार्टी “भारतीय जनता संघ ” का निर्माण किया | इस पार्टी में उनको उत्तरी प्रभाग का राष्टीय सचिव चुना गया | उनकी वाक्पटुता से जवाहर लाल नेहरु इतने प्रभावित हुए कि उन्होंने अटल बिहारी वाजपयी को भविष्य का प्रधानमंत्री बता दिया । जिसके बाद 1996 के लोकसभा चुनावो में BJP जीत हुई औऱ वाजपयी को प्रधानमंत्री बनाया गया इस बीच 2004 तक वह 3 बार प्रधानमंत्री रहे । इस बीच अटलजी ने कई ऐतिहासिक फैसलों लिए लेकिन उनका सबसे साहसिक फैसला रहा 1998 का परमाणु परीक्षण । राजस्थान के पोखरण में डा एपीजे अब्दुल कलाम के नेतृत्व में 2 दिन के अंदर 5 परमाणु परीक्षण करके उन्होने सारी दुनिया को चौंका दिया और पूरी दुनिया को भारत की ताकत दिखा दी । उनका कार्यकाल सबसे सफल प्रधानमंत्री के कार्यकाल के तौर पर देखा जाता है । साल 2005 में उन्होंने ने राजनीति से संन्यास ले लिया | वो अपनी कविताओ के लिए बहुत प्रसिद्ध रहे और उन्होंने कई किताबे लिखी | अटल बिहारी वाजपयी ने बिना शादी किये निस्वार्थ भाव से अपना पूर्ण जीवन राष्ट्र सेवा में समर्पित कर दिया |