प्राइम टाइम

योग दिवस के नाम पर जनता को गुमराह करती सरकार.

Posted by Karan Pawar on



आज अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस है , भारत सहित पूरे देश में लोग योग कर रहे है ।जो जहां मौजूद है, जहां संभव है, वहां योग कर रहा है। अलग-अलग जगह योग करने की कई हैरान कर देने वाली तस्वीरें सामने आ रही है। भारतीय वायु सेना ने भी योग कीतस्वीरें पोस्ट की हैं। वायु सेना ने 15000 फीट की ऊंचाई पर योग किया। इसके अलावा अरुणाचल प्रदेश में भारत-तिब्बत सीमा पुलिस के जवानों ने लोहितपुर में दिगारू नदी में 'नदी योग' किया। इसके अलावा नौसेना के कर्मियों ने मुंबई में आईएनएस विराट पर योग किया। एक तरफ जहां लोगों पर योग के प्रति जागरुकता बड़ा है तो दूसरी ओर स्वास्थ्य संगठन की रिपोर्ट पर हमें गौर करने की जरुरुत है ।
दूसरी ओर , स्वास्थ्य के मामले में पिछड़ रहे भारत में योग को तरजीह देना मुख्य मुद्दों से आम जनता का ध्यान भटकाने जैसा है । कहता है कि 1,000 की आबादी पर एक डॉक्टर होना चाहिए लेकिन भारत में 11,082 की आबादी पर एक डॉक्टर है. मतलब 10,000 की आबादी के लिए कोई डॉक्टर नहीं है. नतीजा डॉक्टर और अस्पताल की महंगी फीस और महंगी होती स्वास्थ्य व्यवस्था । भारत का ग़रीब आदमी या सामान्य आदमी भी एक बार अस्पताल में भर्ती होता है तो औसतन 26 हज़ार रुपये ख़र्च करता है. जो हमारी प्रति व्यक्ति आय है उसके हिसाब से एक बार भर्ती होने पर तीन महीने की कमाई चली जाती है.देश में पांच लाख डॉक्टरों की कमी है. एम्स जैसे संस्थानों में पढ़ाने वाले डॉक्टर शिक्षकों की 70 फीसदी कमी है. इस हक़ीक़त पर पर्दा डालने के लिए योग का प्रोपेगैंडा लाया गय़ा है । नेशनल हेल्थ प्रोफाइल के हिसाब से उन प्रदेशों की हालत बहुत ख़राब अर्थात रद्दी से भी बदतर हैं जहां की एक भाषा हिन्दी भी है. बिहार में 28,391 लोगों पर एक डॉक्टर है यानी 27,000 लोगों के लिए कोई डॉक्टर नहीं है. उत्तर प्रदेश में 19,962 लोगों पर एक डॉक्टर है. मध्य प्रदेश में 16,996 लोगों पर एक डॉक्टर है. झारखंड में 18,518 लोगों पर एक डॉक्टर है. छत्तीसगढ़ में 15,916 लोगों पर एक डॉक्टर है. कर्नाटक में 18,518 लोगों पर एक डॉक्टर है. हम योग के सपोर्टस है और हम सभी योग भी करते है लेकिन जिन स्वास्थ्. सेवाओं पर सरकार को ध्यान देना चाहिए वहां से लोगों को ध्यान भटकाने के लिए योग का प्रपोगेंडा लाया गया है ।
विश्व स्वास्थ्य संगठन की रिपोर्ट के अनुसार
1 भारत में 11,082 की आबादी पर 1 डॉक्टर
2 मध्य प्रदेश में 16,996 लोगों पर 1 डॉक्टर
3 आम आदमी के एक बार अस्पताल में भर्ती होने का औसतन ख़र्च 26 हज़ार रुपये
4 एम्स जैसे संस्थानों में 70 फीसदी शिक्षकों की कमी
5 भारत में 5 लाख डॉक्टरों की कमी है.