प्राइम टाइम

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Posted by khalid on



मुख्यमंत्री शिवराज सिंह ने पूर्व मुख्यमंत्री पर बड़ा राजनीतिक हमला सोच समझकर बोला है । उनकी उम्मीद के मुताबिक राजा ठाकुर का सियासी खून उबाल मार गया। शिवराज ने बयान दिया कि दिग्विजय ऐसे व्यक्ति हैं, जो पुलिस द्वारा मारे गए आतंकवादी के घर जाते हैं। आतंकियों को जी कहकर सम्बोधित करते हैं। कई बार मुझे दिग्विजय सिंह द्वारा उठाये गए ये कदम देशद्रोही लगते हैं। बस! फिर क्या था! दिग्विजय ने आरोप साबित करने की चुनौती देते हुए ऐलान कर दिया कि 26 जुलाई का थाने जाकर गिरफ्तारी देंगे। दिग्विजय सिंह ने शिवराज के खिलाफ अदालत जाने की भी घोषणा करते हुए माफी मांगने कहा है। अब राजनीति में नई हलचल पैदा हो गई है। कमलनाथ के नेतृत्व में एक सूत्र में बंधकर सत्ताधारी भारतीय जनता पार्टी और मुख्यमंत्री शिवराज सिंह के लिए बेचौनी बढ़ा दी है। कांग्रेस में दिग्विजय सिंह की मैदानी सक्रियता के कई मायने निकाले जा सकते हैं। दिग्विजय बीते पन्द्रह वर्षों से मध्यप्रदेश की राजनीति से दूर हैं। वे कांग्रेस महासचिव, उत्तरप्रदेश प्रभारी, कांग्रेस कार्यसमिति सदस्य जैसे बड़े ओहदों पर सुशोभित रहे लेकिन गृहप्रदेश की राजनीति से दूर रहे। इस बीच नर्मदा में बहुत पानी बह चुका है। नर्मदा परिक्रमा के माध्यम से वे मध्यप्रदेश में सुर्खियों में आये। उन्हें पार्टी की सर्वोच्च कार्यसमिति से बेदखल किये जाने के बाद पार्टी की राजनीति में उनकी भूमिका को लेकर चर्चाओं का दौर जारी है। ऐसे वक्त में मुख्यमंत्री शिवराज सिंह ने उन्हें मध्यप्रदेश की राजनीति में जलवा दिखाने का एक तरह से न्यौता दे दिया। दिग्विजय के खिलाफ शिवराज ने जो बयान दिया है, वह नया नहीं है। दिग्विजय के खिलाफ इस तरह के बयान भाजपा नेताओं की तरफ से पहले भी आते रहे हैं। भाजपा जानती है कि दिग्विजय सिंह के बोल पर ढोल पीटकर वह कांग्रेस को बेहतर तरीके से घेर सकती है। देश में जहां-जहां कांग्रेस ने दिग्विजय की चुनावी सेवाएं लीं, वहां-वहां से कांग्रेस के लिए भारी और भाजपा के लिए फायदेमंद साबित हुई।
राजनीति महत्वाकांक्षा का वो जंगल है, जिसकी रौनक कभी कम नहीं होती! मध्यप्रदेश की राजनीति में दिग्विजय सिंह इकलौते ऐसे उदाहरण हैं। जिन्होंने 2003 की हार के बाद दस वर्ष तक चुनावी राजनीति से दूर रहने का वचन निभाया। दिल्ली की राजनीति में रमने के बाद अर्जुन सिंह के साथ भी ऐसे हालात बन गये थे। मुख्यमंत्री शिवराज सिंह ने उन्हें चुनावी वक्त में प्रासंगिक बनाने जुबानी तीर चला दिया। सियासी तीर कहीं मारा है, लेकिन लगा कहीं और है। ऐसा कहें कि शिवराज ने दिग्विजय के कंधे पर रखकर सियासी बंदूक कांग्रेस पर चला दी है। अगर कांग्रेस दिग्विजय सिंह को तीखे तेवर के साथ नये कलेवर में इस्तेमाल कर ले, तो शिवराज का दांव उलटा भी पड़ सकता है। प्राइम टाइम में इतना ही