प्राइम टाइम

प्राइम टाइम - अस्थि कलश को लेकर राजनीति कर रही भाजपा

Posted by Divyansh Joshi on



भाजपा के समर्थन में कभी हाथ से हाथ मिलाकर चलने वाली शिवसेना कुछ दिन पहले पूर्व प्रधानमंत्री स्वर्गीय अटल बिहारी बाजपेयी के निधन की घोषणा को लेकर एक संपादकीय लिखी है जिसकी चर्चा जोरो पर है । शिवसेना के मुख पत्र ‘सामना’ में यह सवाल खड़ा किया है कि क्या वाजपेयी के निधन की खबर 16 अगस्त को इसलिए घोषित की गई थी ताकि प्रधानमंत्री मोदी का लाल किले से दिया जाना वाला भाषण बाधित न हो? ‘सामना’ में यह संपादकीय लिखने वाले संजय राऊत भी राज्य सभा सदस्य हैं और अब इस संपादकीय के बात बहुत से सवाल खड़े हो गए है । आज हम इन सवालो के बारे में बात करेंगे ।
यह कोई नई बात नहीं है कि भाजपा किसी भी मुद्दे को भुनाने के लिए कोई कोर कसर नहीं छोड़ती , और अब तो चुनावी साल है इस साल के अंत में मध्यप्रदेश में चुनाव है और अगले साल लोकसभा के चुनाव । जिसको देखते हुए यह भाजपा के लिए और जरुरी हो जाता है कि ऐसा कोई मुद्दा उन्हे मिले जो उन्हे जीत के पास पहुचा दे । पूर्व प्रधानमंत्री स्वर्गीय अटल बिहारी बाजपेयी के अस्थि कलश को लेकर पूरे देश में संघ और भाजपा द्वारा घुमाए जाने में कोई आश्चर्य नहीं है। संघ और भाजपा के रणनीतिकार किसी भी चीज को पूरे देश में घुमा कर माहौल तैयार करने की कोशिश में विशेषज्ञ है। पहले भी ऐसा किया जा चुका है। पोखरण परमाणु परीक्षण के स्थल से रेत को कई साल तक घुमाया गया। विज्ञान के जानकार आश्चर्य चकित थे कि इस रेत को आखिर भाजपा और संघ ने कहां से हासिल की क्योंकि मीलो तक परमाणु विकरण के खतरे को देखते हुए परीक्षण स्थल का रेत कोई छू भी नहीं सकता था। इसी तरह कारगिल में जवान शहीद हुए उनके ताबूत को लेकर राष्ट्रीयता का प्रदर्शन करने की कोशिश हुई। ताबूत के बाद अब यह अस्थि कलश भाजपा यही नहीं रुकी बल्कि अब अटल जी की तेरहवी को लेकर भी पूरे देश में कार्य़क्रम रखे जा रहे है । 2019 के चुनाव को देखते हुए उन अटल बिहारी वाजपेयी के निधन को चुनावी मुद्दा बनाने की कोशिश की जा रही है । संघ और भाजपा दोनों ही वाजपेयी को उनके न रहने के बाद ‘अपना’ साबित करने के लिए सड़कों पर उतर गए हैं।