प्राइम टाइम

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Posted by khalid on



भोपाल। मध्यप्रदेश की राजनीति में अब एक नया रंग उभर आया है। पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह ने मुख्यमंत्री शिवराज सिंह के खिलाफ गुरुवार को जिस तरह शक्ति प्रदर्शन किया, उसमें प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष कमलनाथ के साथ ने यह अहसास करा दिया कि प्रदेश में कांग्रेस एकजुट संघर्ष के रास्ते पर आगे बढ़ चली है। दिग्विजय सिंह प्रदेश कांग्रेस मुख्यालय से हजारों समर्थकों एवं वरिष्ठ कांग्रेस नेताओं के साथ रैली की शक्ल में गिरफ्तारी देने टी.टी. नगर थाने पहुंचे। रैली को कमलनाथ ने रवाना किया तो वही वरिष्ठ नेता सुरेश पचौरी ने भी अपनी उपस्थिति दर्ज कराई। कांग्रेस के एक और दिग्गज नेता ज्योतिरादित्य सिंधिया दिल्ली में होने के कारण उपस्थित नहीं हो सके। लेकिन जिस तरह से कांग्रेसियों ने एकता दिखाई, उससे दूर-दूर तक बेहतर संदेश गया है। इस मौके पर कांग्रेस उपाध्यक्ष रामेश्वर नीखरा ने मुख्यमंत्री के विरुद्ध कार्रवाई करने बाकायदा लिखित आवेदन दिया। लेकिन कांग्रेस ने प्राथमिकी दर्ज नहीं कराई, जिसका अर्थ यही है कि यह प्रदर्शन राजनीतिक शक्ति प्रदर्शन ही था। दिग्विजय सिंह के विरुद्ध कोई मामला दर्ज नहीं है, इस कारन पुलिस ने उन्हें गिरफ्तार नहीं किया। इन सबके बीच दिग्विजय सिंह अपने राजनीतिक मकसद में सफल रहे। अब इस प्रदर्शन के सियासी मायने यही निकाले जा सकते हैं कि दिग्विजय सिंह प्रदेश की मैदानी राजनीति में सक्रिय हो गए हैं। उनका यह प्रदर्शन यहां की सक्रिय राजनीति में उनकी वापसी का प्रतीक माना जा रहा है। नर्मदा परिक्रमा के दौरान वे प्रदेश की भी परिक्रमा कर चुके हैं। उस यात्रा के समय से ही यह उम्मीद की जा रही थी कि दिग्विजय जल्द ही मैदानी राजनीति में सक्रिय होंगे। बस, सही मौके का इंतजार था। जैसे ही मुख्यमंत्री शिवराज सिंह ने उन्हें छेड़ा, वे मैदान में उतर गए। अब कमलनाथ और ज्योतिरादित्य की जुगलबंदी को दिग्विजय सिंह का साथ मिल गया तो कांग्रेस की ताकत बढ़ जायेगी।